उत्तर प्रदेश गोंडा शिक्षा

जब अध्यापक ही निकल रहे गवाँर फिर कैसे बनेगा देश का भविष्य, देखें क्या है जिले में शिक्षा का स्तर

जिले के शिक्षा विभाग की पोल खोलती ये रिपोर्ट, आधिकारियों ने बंद की अपनी आँख और कान 


गोंडा ! मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों – अधिकारी तक शिक्षा के स्तर का सुधरने को लेकर बहुत से दावे करते हैं और शिक्षा का स्तर प्रदेश में काफी सुधर चुका है यह भी कहते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं थकते हैं …. बहुत से जिलों में शिक्षा का स्तर काफी हद तक सुधर भी चुंका है …. लेकिन धरातल पर गोण्डा में शिक्षा का स्तर कितना सुधरा है इसका आज हमारे संवादाता ने रियलिटी चेक किया। हमारे गोण्डा संवाददाता ने शिक्षा क्षेत्र झंझरी के दुल्लापुर खालसा में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय का रियलिटी चेक किया और वहां के कक्षा 3 – कक्षा 4 में पढ़ने वाले बच्चों से कुछ जानकारियां ली तो जो तस्वीर निकल कर सामने आई वह चौकाने वाली थी।

           यहां के छात्रों को उनके जिले का ही नाम सही से लिखना नहीं आता है …. जंहा एक छात्रा से जब जिले का नाम लिखवाया गया तो उसने गोंडा के बजाय “गुण्डा” लिखा वहीं एक छात्र विद्यालय तक ठीक से नहीं लिख पाया …. उससे जब एक छोटा सा नाम पूजा लिखाया गया तो उसने “पुज” लिख दिया। कक्षा 3 और 4 में पढ़ने वाले बच्चों का तो यह आलम था लेकिन कक्षा आठ में पढ़ने वाले बच्चों का और भी बुरा हाल है …. इन छात्रों को अपने प्रधानमंत्री – मुख्यमंत्री और जिले के जिला अधिकारी तक का नाम नहीं पता है …. एक छात्र से जब पिता लिखवाने की बात कही गयी तो उसने “पीता” लिखा। बात अगर इन नन्हे मुन्ने छात्रों या कक्षा आठ में पढ़ने वाले छात्र – छात्राओं की होती तो शायद गनीमत भी थी लेकिन इन छात्र – छात्राओं को शिक्षा देने वाले अध्यापकों का भी कुछ बुरा हाल देखने को मिला …. कक्षा 4 की अध्यापिका से जब माननीय मुख्यमंत्री लिखने को कहा गया तो वह भी “माननीय” भी सही ढंग से नही लिख पायी। अब ऐसे में साफ तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार शिक्षा के स्तर को लेकर जो कसीदे सरकार पढ़ रही है और जितनी जुमलेबाजी कर रही है वह सिर्फ हवा – हवाई ही है …. जबकि जमीनी हकीकत इन बातों से लाखों दूर है।
           हैरानी तो तब हुई जब जिले में शिक्षा के रसातल में पहुँच चुके हाल की जानकारी और इस पर किये जाने वाले कार्यवाही के बारे में विभागीय मुखिया बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीराम से दूरभाष द्वारा संपर्क करने का प्रयास किया गया तो काफी देर घंटी बजने के बाद उन्होंने फोन उठा जवाब देने के बजाय फोन डिस्कनेक्ट करना ही उचित समझा जिससे उनकी मानसिकता को बड़ी आसानी से समझा जा सकता है की उनकी रूचि न तो समस्याओं को सुनने में है और न ही उनके सुधार में है !