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अवैध कब्जेदारों को संरक्षण देने में जुटा चिकित्सालय प्रशासन, सीएमओ बता रहे रहे गम्भीर अनियमितता

Written by ashfaq shah

गोण्डा। जिला चिकित्सालय के परिसर में स्थित नर्सेस हास्टल में अवेध रूप् से रह रहे कब्जेदारों का मामला अब तूल पकडता जा रहा है। मंगलवार को प्रात सीएमएस नर्सेस हास्टल में रह रहे लोगों से पूछताछ की और स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान यह बात तो बिल्कुल स्पष्ट दिखी कि यहां सबकुछ ठीक ठाक नहीं है। यहा रहने वाले लोग भले ही स्वास्थ्य विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी हो लेकिन वह अवैध रूप् से कब्जा किये हुए हैं। इन नाजायज कब्जेदारों को नाजायज तरीके से अन्य सुविधायें भी चिकित्सालय प्रशासन द्वारा ही उपलब्ध करायी जा रही है। अब मामला सुर्खियों में आने पर चिकित्सालय प्रशासन डैमेज कन्ट्ोल के नाम पर उन्ही को संरक्षित करने में जुट गया है।

उल्लेखनीय है कि चिक्तिसालय के सूत्रों से मिल रही जानकारी पर यकीन किया जाये तो वर्षो से जिला चिकित्सालय के नर्सेस हास्टल में कब्जा जमायें अवैध कब्जेदारों पर पूर्व में कई बार नोटिस दिये जाने की कार्यवाही की जा चुकी है, किन्तु यहां रह रहे नाजायज कब्जेदारो ंपर इस नोटिस का कोई असर नहीं पडा और वे निर्बाध रूप् से वर्षो से यहीं जमे पडे हैं। चिकित्सालय प्रशासन पुनः इन्हे नोटिस दिये जाने की बात पर विचार कर रहा है जिसका हाल भी वही होगा जो पूर्व की नोटिसों को हो चुका है।

नर्सेस हास्टल का निरीक्षण करने व वहां रह रहे कब्जेदारों के विषय पर पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुए सीएमएस वीरपाल ने हमारे संवाददाता को चौकातें हुए बताया ि कवे उन्हें अवैध कब्जेदार ही नहीं मानते वे स्वास्थ्य विभाग के रिटायर कर्मचारी हैं जिन्हें आवास खाली करने के लिए कहा गया है। जल्द ही उन्हें नोटिस के द्वारा सूचना देकर आवास को खाली करने के लिए कहा जायेगा।
प्रश्न कई हैं कि आखिर कैसे नर्सेस हास्टल में रिटायर होने के बाद भी लोगों ने कब्जा जमा रखा है

– क्या चिकित्सालय प्रशासन रिटायर होने के बाद भी कर्मचारियों को किराये पर आवासीय सुविधा उपलब्ध करा सकता हैं

– क्या रिटायर कर्मचारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग वाकई में इतना संवेदनशील है कि वो उन्हें नियमों के विपरीत आवासीय सुविधा उपलब्ध कराता रहे

– क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई ऐसा भी नियम हे कि रिटायर कर्मचारियों के पेशन पर भी आवासीय सुविधा निर्गत किया जाता रहे

– क्या रिटायर कर्मचारियों के सापेक्ष कार्यरत कर्मचारियों के द्वारा आवास आवंटन मांग न किये जाने पर रिटायर कर्मचारियों को आवास में बने रहने का अधिकार है

बेहद जटिल हो चुके इस गम्भीर अनियमितता के मामले में जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संतोष श्रीवास्तव से जब विस्तार से जानकारी चाही गयी तो उन्होंनें एक कार्यक्रम में व्यस्तता की बात कहते हुए सक्षिप्त उत्तर देते हुए बताया कि कोई भी ऐसा नियम स्वास्थ्य विभाग का नही है कि रिटायरमेन्ट के बाद भी कर्मचारी को आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाती रहे। उन्होनें स्पष्ट कहा कि ऐसा केई भी नियम नहीं है। एकतरफ जहां मुख्य चिकित्साधिकारी रिटायरमेन्ट के बाद आवास में जमे रहने वाले कर्मचारियों को अवैध बता रहे है वहीं दूसरी ओर जिला चिकित्सालय प्रशासन अभी भी मामले को वैध ही बताने पर तुला हुआ है। जिन अवैध कर्मचारियों के विरूद्व उसे दण्डात्मक कार्यवाही करनी चाहिए थी उनका वह संरक्षण करने में लगा हुआ है।

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