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एक की जांच पूरी नहीं, दूसरे घोटाले का मिला स्वास्थ्य विभाग को सुअवसर

Written by ashfaq shah

निर्माणाधीन चिकित्सालय के संसाधनों हेतु मिले 5 करोड़ 44 लाख

पूर्व में हुए 1 करोड़ 20 लाख के खरीद घोटाले की अभी चल रही है जांच 

गोण्डा। जिले में बन रहे 300 शैयया वाले निर्माणाधीन चिकित्सालय में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के लिए शासन ने 5.44 करोड़ रूपये का बजट जारी कर दिया है। सीएमओ कार्यालय की माने तो यह बजट विभाग को प्राप्त भी हो चुका है जिसका उपयोग शीघ्र ही संसाधनों की खरीद मेंं किया जायेगा, लेकिन सवाल यह उठता है कि पूर्व में 1.2 करोड की हुयी खरीद में जिस तरह से घोटाला उजागर हुआ और उसकी जाचं भी चल रही है क्या यह 5.44 करोड की खरीद भी कहीं घोटालों की भेंट न चढ जाये। हालाकिं स्वास्थ्य विभाग के मुखिया यह दावा करते नहीं थक रहे कि सभी खरीद शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही की जायेगी।

जिले के ही नहीं वरन मण्डल के जिलों से आने वाले ंमरीजों की भारी संख्या को देखते हुए जिले में महिला चिकित्सालय एवं पुरूष जिला चिकित्सालय को विस्तार देते हुए शासन द्वारा 300 शैयया वाले नये चिकित्सालय भवन निर्माण की संस्तुति पूर्व समाजवादी शासन काल में की गयी थी। प्रदेश सरकार के अनुसार इन भवनों को तीन वर्ष में निर्मित कर जिले के स्वास्थ्य विभाग को हैण्डओवर करना था किन्तु स्थानीय शासकीय लेटलतीफी और राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते जिम्मेदारों ने इसके निर्माण मे ंरूचि नही दिखाई और चार वर्ष का समय व्यर्थ गवांं दिया। वर्तमान समय में अभी भी भवन में अनेकों महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण होने बाकी हैं जिसकें पूरे होने की संभावना आगामी 2 से लेकर तीन महीनों में है।

वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस भवन के संचालन के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 5.44 करोड़ रूप्यों का बजट जारी किया है। इस बजट के द्वारा आपरेशन कक्ष, आपतकालीन कक्ष, गहन चिकित्सा कक्ष एवं वार्डो के संसाधनों की खरीद की जानी है जिसके लिए शासन ने बजट जारी करते हुए खरीद की मंजूरी भी दे दी है। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी किया गया है, विभाग इस गाइडलाइन का अध्ययन कर रहा है इसके बाद ही खरीदी की जायेगी। विभाग का कहना है कि कौन कौन से उपकरण कितनी संख्या में खरीदे जायेगें इसका शासनादेश प्राप्त हुआ है उसी के अनुरूप खरीदारी की जायेगी इनमें मुख्यतयः आक्सीजन प्लाण्ट का निर्माण, एक्सरे मशीन, सीटी स्कैन, अल्ट्ासाउण्ड मशीनों की खरीद की जानी है।

इस बारें मे सीएमओ डा0 संतोष श्रीवास्तव का कहना है कि मण्डलीय चिक्तिसालय के लिए शासन से उपकरणों की खरीद के लिए बजट विभाग को मिल गया है। शीघ्र ही चिकित्सालय बन कर तैयार हो जायेगा, हैण्डओवर होते ही आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की खरीदारी की जायेगी। जिससे मण्डल के लिए बेहतर चिकित्सीय सुविधा जिले में उपलब्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि इस बजट के जारी होने से पूर्व ही इस नये 300 शैयया वाले चिकित्सालय के लिए नियमों को ताक पर रख 1.2 करोड रूप्ये से तत्कालीन सीएमएस डा0 आशुतोष कुमार गुप्त के कार्यकाल में ही खरीददारी की जा चुकी है। इस खरीद में दिखाई पड रहे संसाधनों में मात्र कुछ बिस्तर, सैकडों की संख्या में स्टूल ट्े एवं दर्जनों की संख्या मेंं अलमारियों की खरीदारी कर करोडों रूप्ये के सरकारी धन का बदंरबांट कर लिया गया, मामलें ने जब तूल पकडा तो इस खरीद की जाचं के लिए एक कमेटी गठित कर दी गयी जिसका अभी तक कोई भी प्रभाव दिखाई नहीं पड रहा।

पूर्व में हुयी इस खरीद घोटालें की जाचं अभी पूरी भी नही हुयी थी कि नया 5.44 करोड का बजट और आ गया, पूर्व में खरीदे गये उपकरण निर्माणाधीन भवन के बाहर खुले में ही रखें हुए है जिनकी सुरक्षा का भी अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया है। लापरवाही के साथ रखे ये करोडों के उपकरण धीरे धीरे कबाड में तब्दील हो रहे है। विभागीय सूत्रों की माने तो खुले मे ंरखे गये ये सामान वहां इसलिए रखे गये है कि बाद में इन्हें यह दिखा कर भारी गोलमाल किया जा सके कि कई उपकरण चोरी हो गये। जिले के लोगों के साथ ही मण्डल के मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहा जिले का स्वास्थ्य विभाग अपने अन्दर ही व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है जिससे लोगों में यह आशंका घर कर रही है कि कही इस बजट का भी वही हाल न हो जो पूर्व में किये गये घोटालों की तरह ही घोटालों की भेंट न चढ जाये।

जिला स्वास्थ्य विभाग कब लोगों के लिए इस मण्डलीय चिकित्सालय का द्वार खोलेगा इसका जिले के जनता को वर्षो से एक लम्बा इंतजार है।

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