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युपीएचएसएसपी टीम के वापस होते ही पुराने ढर्रे पर लौटी चिकित्सालय की व्यवस्था

Written by Ashfaq shah

टूटे और गायब गमले दे रहे चिकित्सालय के भ्रष्ट व्यवस्था की गवाही

गोण्डा। जिला चिकित्सालय से यूपीएचएसएसपी टीम के जाते ही स्थिति फिर अपने पुराने ढर्रें पर लौट आयी। टीम के वापस लौटते ही सफाई का जिम्मा संभालने वाली कम्पनी के कर्मचारियों एवं विभिन्न आउटसोर्सिग कम्पनियों से नियुक्त कर्मचारियों ने चैन की सांस ली, लगातार 48 घंटे तक काम करने वाले कर्मचारियों को दूसरे दिन डयूटी के दौरान ही इधर उधर बैठे सोते और गप्प बाजी करते हुए देखा गया। टीम के दौरे के दौरान आनन फानन में किये गये सुन्दरीकरण में प्रयोग किये गये सामानों के गायब होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। मरीजों को प्राप्त होने वाली सुविधाओं में भी लापरवाही पहले की तरह ही बरतनी आरम्भ हो गयी।

विदित हो कि विगत पाचं जनवरी को उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय से आई टीम ने चिकित्सालय का निरीक्षण एवं फिल्मांकन कई बिन्दुओं पर किया था जिनमें मे आई हेल्प यू डेस्क, पंजीकरण काउण्टर, दवाओं की उपलब्धता एवं उनका प्रर्दशन, की जाने वाली जाचों की उपलब्धता एवं उनका कार्यसमय, साफ सफाई एवं बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण, चिकित्सालय की सुन्दरता एवं मरीजों व तीमारदारों को उपलब्ध कराया जा रहा भोजन एवं बुनियादी सुविधाये आदि प्रमुख थी जिसका टीम ने गहन निरीक्षण कर उनका फिल्मांकन भी किया था।

किन्तु सोमवार को इस टीम के जाते ही चिकित्सालय की पिछले चौबीस घंटे दिखी चाक चौबन्द व्यवस्था फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लौट आयी, चिकित्सालय मे ंलगे गमले और उनके स्टैण्ड कहीं गिरे दिखे तो कहीं उखडे, उनमें लगे पौधे भी जगह जगह से गायब दिखे। कई कर्मचारियों एवं भर्ती मरीजों के तीमारदारो ंका कहना था कि कई गमले मात्र पानी डालने से ही टूट कर जमीन पर गिर गये और कई ऐसे भी है जो पहले से ही टूटे फूटे है किन्तु लगे हुए हैं। दबी जुबान से लोग यह भी कह रहे है कि गमले एंव पौधों की खरीद में भी भारी गोलमाल किया गया है।

अब बात करें चिकित्सालय की साफ सफाई और मरीजो के मिलने वाली सुविधाओं की तो मरीजो के विस्तरो ंपर टीम के आगमन के समय लगायी गयी चादरें आज सोमवार तक भी लगी रहीं उन्हे ंबदलने की जहमत तक नहीं उठाई गयी। कई चिकित्सक एवं कर्मचारी चिकित्सालय में पहले की तरह बिना ड्ेस और बैज के नजर आये। साफ सफाई व्यवस्था भी पूर्व की भाति ही पटरी से उतरी नजर आयी। इन सब कारणों के पीछे हर बार मात्र प्रबध्ांन की कमी ही उभर कर सामने आती है जिसका जिम्मेदार जिला चिकित्सालय मे ंयूपीएचएसएसपी का जिला प्रबध्ांक होता है उसके द्वारा ही गहन मंथन करने के प्श्चात सुविधाओं को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव बनाकर उसे यूपीएचएसएसपी के मुख्यालय भेजा जाता है। प्रस्ताव मिलने के बाद टीम स्थलीय निरीक्षण करती है तत्पश्चात उस मद के लिए राशि स्वीकृत की जाती है इसके प्श्चात ही सुविधा अस्तित्व में आती है।

केन्द्र एवं प्रदेश सरकार आम जनमानस को बेहतर चिकित्सीय सूविधा एवं आवश्यक सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए एक बडी राशि खर्च करती है जिसे भिन्न भिन्न मदों में जारी किया जाता है। बेहतर सुविधाओ के लिए मिलने वाले इस मद के आते ही मनमाने तरीके से इसका उपभोग कर लिया जाता है। इससे आम जनमानस को मिलने वाली सुविधा भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाती है। इससे मिलने वाली सुविधाओ को स्थायित्व नहीं मिल पाता हालात फिर से अपने पुराने ढर्रे पर लोट आती है। जिम्मेदारों को इस पर विचार करना होगा।