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युवा दिवस संगोष्ठी में याद किये गये स्वामी विवेकानन्द

लखनऊ ! भारतीय नागरिक परिषद द्वारा स्वामी विवेकानन्द की जन्म जयंती पर आयोजित संगोष्ठी – ‘‘युवा दिवस युवा भारत’’ में मुख्य वक्ता आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारत की युवा शक्ति और भारतीय आध्यात्म के दर्शन का परिचय पूरे विश्व को कराया था।

भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुंचा। उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने ही संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृत-दोनों की ही शिक्ष दी। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने पूरी दुनिया के समक्ष यह तथ्य रखा कि पृथ्वी के समस्त धर्मों और दुनिया के उत्पीड़ितों व शरणार्थियों को आश्रय देने का कार्य भारत ने ही किया। स्वामी विवेकानन्द ने बलपूर्वक कहा कि अध्यात्म विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जायेगा। आज स्वामी जी के जन्म को 156 वर्ष बाद उनकी कही बातों का सारी दुनिया लोहा मान रही है। उन्तालीस वर्ष के संक्षिप्र जीवनकाल में स्वामी विवेकानन्द जो काम कर गये वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

उन्होने कहा कि 21वीं शताब्दी में युवा शक्ति के जरिये ही भारत विश्व शक्त् बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में स्वामी विवेकानन्द का प्रेरणास्पद स्मरण हमारे लिये जीवनी शक्ति है।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि आज पूरी दुनिया में भारत के युवाओं की मेधा व प्रतिमा का उभार दिख रहा है। हम आभारी हैं स्वामी विवेकानन्द के जिन्होंने अकेले पहल की और भारतीयता का दर्शन प्रस्तुत कर दुनिया को भौचक्का कर दिया और भारत को उसका खोया गौरव वापस दिलाया। स्वामी जी ने ही भारत के युवाओं की मेधा और ऊर्जा से दुनिया की पहचान करायी। आज विवेकानन्द होते तो वाकई भारतीय युवाओं की दुनिया में धाक देख और अपने सपने को पूरा होते देख अवश्य खुश होते।

भारतीय नागरिक परिषद के संस्थापक ट्रस्टी रमाकान्त दुबे ने कहा कि स्वामी जी केवल सन्त ही नहीं, एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव प्रेमी भी थे। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा स्त्रोत बने। उनका विश्वास था कि पवित्र भारत वर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्य भूमि है।

भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत थे। उन्होंने धर्म को मनुष्य की सेवा के केन्द्र में रखकर ही आध्यात्मिक चिन्तन किया था।

परिषद की महामंत्री रीना त्रिपाठी ने कहा कि स्वामी जी ने संकेत दिया था कि विदेशों में भौतिक समृद्धि तो है और उसकी भारत को जरूरत भी है किन्तु हमें याचक नहीं बनना चाहिए। हमारे पास उससे ज्यादा बहुत कुछ है जो हम पश्चिम को दे सकते हैं और पश्चिम को उसकी बहुत जरूरत भी है। यह आज प्रभावित हो रहा है। स्वामी विवेकानन्द का अपने देश की धरोहर के लिए दम्भ या बड़बोलापन नहीं था। यह एक वेदान्ती साधु की भारतीय सभ्यता और संस्कृति की तटस्थ, वस्तुपरक और मूल्यवात आलोचना थी। बीसवीं सदी के इतिहास ने बाद में उसकी पर मुहर लगायी।

इस अवसर पर सरोजनी नगर की डा. मिथिलेस सिंह को भारतीय नागरिक परिषद की ओर से प्रशस्ति पत्र मानवता पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। डा. मिथिलेस सिंह ने प्राथमिक विद्यालय अलीनगर, खुर्द की गरीब छात्रा का निःशुल्क इलाज कर उसका पैर कटने से बचाया और उसे नया जीवन दिया।