अपराध उत्तर प्रदेश गोंडा

मोदी के सपने को पलीता लगा रहे उनके ही अधिकारी, गन्दगी ओैर भ्रष्ट कार्यशैली से लबालब रूपईडीह ब्लाक की कहानी

रूपईडीह गोण्डा। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के सपनों को उनके ही अधिकारी किस तरह पलीता लगा रहे है इसकी बानगी देखनी हो तो एक चक्कर जनपद के रूपईडीह ब्लाक का लगा लीजिए यहां की भ्रष्ट कार्यशैली और गन्दगी की पूरी कहानी स्पष्ट रूप से सामने आ जायेगी।

 

जी हां स्थानीय और विश्वस्त सुत्रों से मिली इस जानकारी पर जब समाचार वार्ता की टीम ने रूपईडीह ब्लाक की इस जानकारी की हकीकत परखने की कोशिश की तो मामला बताये जाने से भी बढकर निकला, पूरे परिसर में आवारा कुत्तो और जानवरों का डेरा लगा दिखागन्दगी का तो आलम यह रहा कि ब्लाक परिसर में ही स्थित प्रसव केन्द्र सहित पूरे का पूरा ब्लाक परिसर ही तालाब के रूप मे ंसामने दिखाई दिया जहां कब से गन्दा और बदबूदार पानी भरा है कुछ कहा नहीं जा सकता, ठीक इसी तरह ब्लाक परिसर में बने शौचालयों का हाल तो यह बयान कर रहा था कि शायद ही इसके निर्माण से लेकर आज तक किसी ने इसका प्रयोग किया हो, परिसर में बने सभी शौचालयों के दरवाजे अपने जगह से कब गायब हो गये कोई बता नहीं सका, टूटी सीटों में शराब की बोतले भरी पडी थी और भरपूर गन्दगी किसी को अपने पास फटकने का भी अवसर नहीं दे रही थी। इतना ही नहीं ब्लाक परिसर में स्थित कार्यालयों के अन्दर भी गन्दगी ने अपना सामा्रज्य स्थापित कर रखा था।

 

हैरानी की बात तो यह रही कि जब इस गन्दगी और अव्यवस्था पर प्रभारी बीडीओ के डी मिश्र से जानकारी चाही गयी तो उन्होनें स्वयं अपने भ्रष्ट कार्यशैली का भी परिचय देते हुए बताया कि गन्दगी तो होती रहती है रही बात शौचालयों के दरवाजे की तो वह क्षेत्र पंचायत का पैसा बाधित होने के कारण लग नही पाया पैसा आते ही दरवाजे लगा दिये जायेगें।

 

अब यह तो सर्वविदित है कि जब शौचालय निर्माण हुए थे तब तो दरवाजे आदि भी लगाये गये होगें, जो दरवाजे या अन्य संसाधन शौचालयों के संचालन हेतु लगाये गये थे क्या वह बिना पैसे के लगाये गये थे, उनकी देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। निर्माण के समय खर्च किये गये पैसों को दरकिनार कर पुनः जनता के धन का दुरूप्योग कर दरवाजों को लगवाया जाना कहा तक उचित होगा। साथ ही उन्होनेंं इस बात को भी दरकिनार कर दिया कि ब्लाक परिसर की सफाई के लिए सफाई कर्मियों की नियुक्ति है तो फिर नियमित सफाई क्यों नहीं होती। क्या चाय की दुकानों और पान की ढाबलियों पर डेरा जमाये राजनीति कर रहे सफाई कर्मियों को अपना कार्य न करने का समर्थन दे रहे बी डी ओ की उनसे मिली भगत नहीं है।