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कोर्ट ने पुलिस से मांगी आख्या, डा0 एम के गुप्त व फार्मासिस्ट बी डी सोनी ने मांगी थी मरीज से रिश्वत

Written by Pankaj Dixit

सीएमओ तथा पुलिस से शिकायत के बाद भी नही हुयी थी कार्यवाही, पीडित ने ली थी न्यायालय की शरण

गोण्डा। जिला चिकित्सालय में जड जमा चुका भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा, यहां आये दिन मरीजों से अवैध वसूली की शिकायतों आम है वह चाहे मेडिकल बनाने के नाम पर हो या फिर शासन द्वारा पूरी तरह मुफत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की बात हो डाक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मी यहां हर सेवाओं के बदले मरीज का शोषण कर उससे अवैध वसूली के प्रयास में ही रहते है।

ताजा मामला भी कुछ इसी तरह का है जिसमें कोटेदार से हुए विवाद में मारपीट में जख्मी पीडित जब मेडिकल कराने जिला चिकित्सालय पहुचां तो वहा चिकित्सक सहित फार्मासिस्ट ने पीडित से 1500 रूप्ये की मांग की, काफी मान मनौव्वल करने के बाद किसी तरह स्वास्थ्य कर्मियों ने पीडित से 700 रूप्ये लेकर ही उसका मेडिकल बनाया, जिसकी शिकायत पीडित ने सीएमओ और पुलिस से की परन्तु किसी ने भी शिकायत को गम्भीरता से नहीं लिया विवश होकर पीडित ने न्यायालय की शरण ली जिस पर न्यायालय ने गम्भीरता दिखाते हुए पुलिस से प्रकरण की आख्या मांगी है।

जनपद के थाना कौडिया अर्न्तगत ग्राम परसिया रानी निवासी पीडित गंगाबिशुन पुत्र जगदीश के एडवोकेट पंकज दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत दिनों गंगा विशुन ने अपने गांव के कोटेदार संतराम द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत मुख्यंमत्रीं पोर्टल पर की थी जिससे खार खाये कोटेदार ने 21 दिसम्बर 2018 को शिकायत कर्ता के घर में घुसकर उससे मारपीट की जिसमें वह गम्भीर रूप् से घायल हो गया था। पीडित गंगाबिशुन ने इस घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस से की घायल का मेडिकल परीक्षण कराने की आवश्यकता नहीं समझी जबकि पुलिसिया कार्यवाही में ऐसी घटनाओं में सबसे पहले मेडिकल परीक्षण आवश्यक होता है।

पीडित ने मामले में मेडिकल की आवश्यकता को समझते हुए स्वयं जिला चिकित्सालय पहुचा और मेडिकल कराना चाहा जिस पर वहां मौजूद डा0 एम के गुप्त औ फार्मासिस्ट बी डी सोनी ने पीडित से मेडिकल बनाने के बावत 1500 रूप्ये की मांग की, पीडित ने रूप्ये देने मे असमर्थता व्यक्त की तो उपरोक्त आरोपियो ंने मेडिकल करने से मना कर दिया। पीडित और बुरी तरह घायल गंगाबिशुन सुबह से लेकर शाम तक आरोपियों के हाथ पैर जोडता रही परन्तु इन भ्रष्टाचारियों का दिल नहीं पसीजा।

एडवोकेट पंकज दीक्षित ने बताया कि थक कर शाम को जब किसी तरह गंगाबिशुन ने 700 रूप्ये की व्यवस्था की आरोपियों को दिया तब जाकर उन्होनें उसका मेडिकल बनाया। उक्त घटना की शिकायत गंगाबिशुन ने सीएमओं तथा नगर कोतवाली पुलिस से की परन्तु किसी ने भी इस जघन्यतम भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाही नहीं की, विवश होकर गंगाबिशुन ने न्यायलय की शरण ली जिस पर न्यायालय ने कडा रूख दिखाते हुए कोतवाली नगर पुलिस से मामले की आख्या मांगी है जिसकी अगली सुनवायी 25 फरवरी को नियत की है।