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बिना कागजी कोरम के पोलिस पहुंची चिकित्सालय, डाक्टरों ने किया इलाज़ से मना, बैरंग लौटी थाने

Written by Ashfaq shah

पुलिसिया निकम्मेपन से गंभीर घायल हुए इलाज़ से वंचित 

बिना नंबर के वाहन और बिना नेम प्लेट के पुलिस निभा रही ड्यूटी 

इटियाथोक गोण्डा। जनपद के थाना इटियाथोक अन्र्तगत ग्रामसभा गिलौली में रास्ते के विवाद को लेकर चाचा व भतीजों के परिवार के बीच हुए खूनी संघर्ष में दोनो तरफ से चार लोग घायल हो गये जिनमें तीन की हालत बेहद गम्भीर बनी हुयी है सूचना पर पहुची पुलिस ने घायलों को बिना मुकदमा दर्ज किये ही जिला अस्पताल पहुचंा दिया जहां घायलों को बिना पुलिस के लिखित पत्र एवं सम्बधिंत सीएचसी के रिफर पत्र के डाक्टरों ने घायलों का मेडिकल व इलाज करने से साफ इन्कार कर दिया, पुलिस घायलों को बिना मेडिकल व इलाज कराये ही वापस थाने रवाना हो गयी, पुलिस की यह नकारा और लापरवाह कार्यशैली चिकित्सालय में चर्चा का विषय बनी हुयी है, चर्चा इस बात की भी हो रही थी कि पुलिस जिस जीप से घायलों को लेकर जिला चिकित्सालय पहुची थी उसमें पीछे की ओर नम्बर प्लेट भी नहंी लगा था जो एसआई घायलो ंको लेकर वहां पहुचा था उसने भी अपनी नम्बर और नेम प्लेट नही लगा रखी थी। जहां जीप में नम्बर न होना मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैरकानूनी है वहीं एसआई के द्वारा नेम ओैर नम्बर प्लेट का न लगाया होना भी सेवा नियमों के विरूद्व हैै।

थाना इटियाथोक के ग्राम सभा गिलौली में आने जाने को लेकर सगे चाचा व भतीजोें के बीच जमकर धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया जिसमें एक पक्ष से झिनका पत्नी बाबूराम, श्रीराम पुत्र रामधीरज, जिगरी पुत्र बाबूराम, रामदुलारी पत्नी जिगरी जबकि दूसरे पक्ष से कन्यावती पत्नी रामप्यारे इस मारपीट में घायल हुए। घायलों मे ंजिगरी, श्रीराम व झिनका की हालत बेहद ही गम्भीर है।

घटना की सूचना मोबाइल के द्वारा पुलिस को मिली थी मोैके पर पहुची पुलिस घायलो को बिना मुकदमा दर्ज किये ही लेकर जिला चिकित्सालय पहुंच गयी उसने न ही घायलो को सीएचसी पहुचाया और न ही वहां से रेफरल लेटर ही बनवाया। पुलिस की इस लापरवाह ओैर निकम्मेपन का परिणाम यह रहा कि डाक्टरो ने घायलों को प्राथमिक उपचार करने के बाद उनका मेडिकल करने व उन्हें भर्ती करने से स्पष्ट इन्कार कर दिया। पुलिस के द्वारा बरती गयी इस लापरवाही के चलते घायलों का इलाज व मेडिकल नहीं हो सका। पुलिस उन्हे जैसे लाई थी वैसे ही बेैरंग वापस लेकर लौट गयी।

पुलिस जिस जीप से घायलों को लाई थी उसमें पीछे की ओर नम्बर प्लेट नहीं था। यू पी 43 जी 0128 नम्बर की यह जीप वर्षो से इसी तरह मोटरवाहन अधिनियम की धज्जी उडा रही है। इस सम्बध में बिना नेम प्लेट लगाये आये एसआई ने यह कहकर कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया कि सम्पूर्ण जानकारी स्टेशन अफसर से ही करें।

घायलों का मेडिकल व इलाज न कराये जाने एवं एसआई का नेम प्लेट न लगाने व गाडी पर पीछे की ओर नम्बर प्लेट न होने की बात पर इटियाथोक एसओ विद्या सागर से फोन पर बात करने पर उन्होनें बताया की पुलिस को मारपीट की सूचना मिली थी जिस पर पुलिस मौके पर पहुची और घायलों को अस्पताल ले गयी, मेडिकल व अति गम्भीर घायलो का इलाज न होने की बात पर वे जवाब न दे सके। मुकदमा पंजीकृत किये जाने की बात पर गोलमोल जवाब देते हुए बताया कि तहरीर नहीं मिली है मिलने पर दर्ज कर लिया जायेगा। एसआई के नेम प्लेट न लगााये जाने व नम्बर प्लेट की बात पर वह भडक उठे और कहने लगे कि इसमें कौन से बडी बात है, जब उन्हें यह बताया गया कि कानून का पालन करवाले वाले ही नियमों का उल्लघन करगें तो इसका गलत संदेश जायेगा तो वे हाईकोर्ट का हवाला देते हुए कहने लगे कि वाहनों पर नम्बरो के अलावा और कुछ भी नहीं लिखा होना चाहिए लेकिन मीडियाकर्मी व पुलिस का लोगो लगााये हुए तमाम लोग घू रहे हैं क्या यह गलत नहंी है। उन्होनें जवाब तो नहंी दिया बल्कि उल्टा मीडिया को ही कटघरे मे ंखडा करते हुए इसे मामूली बात बता दी जबकि एसआई की बात का कोई जवाब नहंी दिया और फोन काट दिया।

मामूली विवाद में हुए इस खूनी संघर्ष में तीन लोग बेहद गम्भीर रूप से घायल थे मौेके पर पुलिस पहुची भी और उसने घायलों को जिला चिकित्सालय पहुचायां भी परन्तु इसके पश्चात पुलिस द्वारा मुकदमा न लिखा जाना, घायलो को चिकित्सालय में भर्ती न कराना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पूरे मामले में पुलिस की कही न कहीं संिलप्तता है और वह मामले को अपने तरीके से दबा कर रफा दफा करना चाहती है।