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पोलिस पीड़ितों की टूटी उम्मीदें, निजी मेडिको लीगल पर लगी रोक

Written by Ashfaq shah

गोण्डा ! आपातकालीन सेवाओं पर लगातार बढ़ते जा रहे प्राइवेट मेडिकल के बोझ से जहां अब आपातकालीन कक्ष को निजात मिलने वाली है तो वहीं दूसरी ओर पोलिस प्रशासन द्वारा विभिन्न कारणों से पीड़ितों की की जाने वाली उपेक्षा में भी बढ़ोतरी होने की संभावना भी बढ़ गई है!

फिलहाल शासन ने पूर्व में मीटिंग के दौरान पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में विचार विमर्श करने के पश्चात या फैसला लिया है कि अब जिला चिकित्सालय में प्राइवेट मेडिकल बंद कर दिए जाएंगे, जिसके बारे में अस्पताल प्रशासन के द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया, संबंधित एवं इस संबंध में प्रमुख अधीक्षक डॉ रतन कुमार ने निर्देश जारी किए और यह बताया है की सोमवार 1 अप्रैल से प्राइवेट मेडिकल लीगल पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा, यह बात किसी से छिपी नहीं है के प्राइवेट मेडिकल के नाम पर जहां वकील एवं डॉक्टरों के बीच मेडिको लीगल बनाने को लेकर कभी कभी तीखी नोकझोंक होती रही है वही नाजायज रूप से मेडिकल बनाने को लेकर धन उगाही का मामला भी प्रकाश में आता रहा है, वहीं कई मामले ऐसे भी प्रकाश में आए हैं जब मेडिकल बनाने के नाम पर डॉक्टरों एवं वकीलों के बीच मारपीट तक की नौबत आ गई इस मामले में कई लोगों से जबरन धन उगाही की भी बातें प्रकाश में कई बार सामने आती रही हैं !

इस बारे में प्रमुख अधीक्षक डॉक्टर रतन कुमार ने बताया है कि कुछ रोज पहले स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के बीच वार्ता में यह बात प्रकाश में आई कि अधिकतर लोग मामले को गंभीर बनाने हेतु पुलिस के पास ना जाकर सीधे डॉक्टर के पास पहुंच जाते हैं और मेडिकल बनवा कर कोर्ट के द्वारा मुकदमा दर्ज कराने का झूठा और नाजायज प्रयास करते जिसे रोकने हेतु यह किया गया है

ध्यान देने योग्य है की बहुत से मामले ऐसे भी प्रकाश में आते रहे हैं जब पुलिस ने गंभीर रूप से घायल एवं पीड़ितों को मेडिकल ना करा मामले को नाजायज तरीके से दबाने का प्रयास किया प्राइवेट मेडिको लीगल करवाने पर ऐसे लोगों को न्यायालय के द्वारा न्याय की आस बनी रहती किंतु यदि इस पर रोक लगा दी गई है तो देखना यह होगा कि ऐसे लोगों को न्याय कैसे मिलेगा !