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तो करोडों मतदाता चाह कर भी नही कर पायेगें अपने मतों का प्रयोग

चुनाव आयोग की उदासीनता पड रही भारी, भारत की अर्थव्यवस्था में है भारी योगदान

गोण्डा। देश की अर्थव्यवस्था में भारी योगदान करने वाले देश के करोडों मतदाता अपने मतों का प्रयोग चाह कर भी नही कर पायेगें, जी हां खाडी देशों सहित अन्य देशों में कामगार व पढाई कर रहे भारत के करोडों मतदाता चुनाव आयोग की उदासीनता के चलते अपने मतों का प्रयोग करने से वचित हो रहे है। ध्यान देने वाली बात तो यह है कि ऐसे लगभग सभी मतदाता इस बार अपना वोट न डाल पाने के चलते काफी क्षुब्ध भी है और ऐसे किसी भी प्रक्रिया की जानकारी के लिए प्रयासरत भी है जिससे उन्हें अपना मत प्रयोग करने की जानकारी मिल सकें।

खाडी देशों मे कार्यरत ऐसे कई मतदाताओ ने ऐसी किसी प्रक्रिया की जानकारी के लिए समाचार वार्ता से सम्पर्क किया जिससे वे देश की सरकार निर्माण मे अपना योगदान दे सकें जिस पर समाचार वार्ता की टीम ने जनपद के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी से सम्पर्क किया तो उन्होनें बताया कि ऐसे लोग जो कामगार या फिर पढाई या फिर किसी अन्य रूप में विदेशों में रह रहे हे उन्हें यदि अपने मत का प्रयोग करना है तो उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में आना होगा तभी वे अपने मत का प्रयोग कर पायेगें इसके अतिरिक्त निर्वाचन आयोग ने किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नही की है। उन्होनें बताया कि जो व्यक्ति सरकारी कर्मचारी के रूप् में विदेशों में निवास कर रहे है उनके लिए ही सर्विस वोट की व्यवस्था की गयी है जिसके तहत वे निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन कर मतदान में भागी दारी कर सकते है।
निर्वाचन आयोग की यह उदासीनता अपने आप में एक आश्चर्य खडा करती है कि जहां एक तरफ विभिन्न कार्यक्रमों के तहत आयोग मतदान प्रतिशत को बढाने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा रही है वहीं देश के बाहर रह रहे ऐसे करोडों मतदाता चाह कर भी अपने मत का प्रयोग नही कर पा रहे है और आयोग भी इस तरफ से पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर निर्वाचन आयोग ने ऐसे मतदाताओं को मताधिकारी के प्रयोग के लिए किसी प्रकिया की तैयारी क्यों नहीं की क्या उनको उनके इस सवैंधानिक अधिकार से विंचंत रखना उनके संवैधानिक अधिकारो ंपर कुठाराघात नहींं है।