महाराष्ट्र राजनीति व्यवसाय

देश का सबसे बड़ा व्यावसायिक घराना भी हुआ राजनीति का शिकार

Written by Vaarta Desk

बाप कांग्रेस तो बेटा दे रहा भाजपा को समर्थन

महाराष्ट्र (मुम्बई) ! मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी शुक्रवार को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में सबसे आगे की सीट पर बैठे हुए नजर आए। ऐसा तब हुआ जब एक हफ्ते पहले ही रिलायंस समूह के अध्यक्ष और उनके पिता मुकेश अंबानी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलिंद देवड़ा का समर्थन किया था।

एक टेलीविजन से अनंत अंबानी ने कहा, ‘मैं यहां देश का समर्थन करने और प्रधानमंत्री को सुनने के लिए आया हूं।’ किरीट सौमेया ने जब चौकीदार-चौकीदार के नारे लगाए तो अनंत ने हाथ उठाया और नारे भी लगाए। इसके उलट अनंत के पिता मुकेश ने दक्षिणी मुबंई से कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करते हुए कहा था कि दक्षिण मुंबई के लिए मिलिंद ही सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।

उन्होंने कहा था, ’10 साल तक दक्षिण मुंबई का प्रतिनिधित्व करने के बाद, मेरा मानना है कि मिलिंद को दक्षिण मुंबई निर्वाचन क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक माहौल का बारीक ज्ञान है। मुंबई में सूक्ष्म-उद्यम और बड़े व्यवसाय दोनों पनप सकते हैं ताकि हमारे प्रतिभाशाली युवा महिलाओं और पुरुषों के लिए आकर्षक, नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने मुंबई के कालाचौकी क्षेत्र में अपनी पिछली रैली के दौरान कहा था कि यह संदेश है कि भाजपा सत्ता में दोबारा नहीं आ रही है क्योंकि मुकेश अंबानी ने देवड़ा का समर्थन किया है। जबकि वह शिवसेना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दोस्त हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अंबानी ने 2014 में भी देवड़ा का समर्थन किया था लेकिन वह हार गए थे। अंबानी और देवड़ा परिवार के बीच लंबे समय से संबंध है।

रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एक वक्त था जब मिडिल क्लास के लिए टेलीफोन बिल एक बड़ा खर्च था। हमारी सरकार की कोशिशों के कारण कॉल करना तकरीबन मुफ्त हो गया है, पूरे विश्व के मुकाबले भारत में सबसे सस्ता डाटा है।

उन्होंने कहा, लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाले लोग हैं, ये भी समझ लें, अब आपकी मिस्ट्री नहीं, सपनों की कैमिस्ट्री काम कर रही है। यही कैमिस्ट्री मेरी और मेरे तमाम साथियों की मुंबई से रही है। आजादी के बाद से कांग्रेस ने 2014 लोकसभा चुनाव में सबसे कम 44 सीटें जीती हैं। 2019 में कांग्रेस अपने इतिहास में सबसे कम सीटों पर लड़ने का रिकॉर्ड बना रही है।