अपराध उत्तर प्रदेश गोंडा लाइफस्टाइल

जिलाधिकारी को भी ठेंगा दिखाने से बाज़ नहीं आ रहे उनके ही मातहत, सात माह पूर्व के आदेशों पर नही हुई आज तक कोई कार्यवाही

गोंडा ! भ्रस्टाचार का दीमक व्यवस्था को किस तरह खोखला कर चुका है यह तो आये दिन सामने आता ही रहता है लेकिन जिले के मुखिया के आदेशों पर भी मातहतों का भ्रस्ट आचरण भारी पड़ जाए ऐसा कम ही दिखाई देता है ! ये मामला इसी वजह से ख़ास हो जाता है की जिले के मुखिया जिलाधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों को भी उनके मातहतों ने क्रियान्वित करना तो दूर उनके स्थान्तरित होते ही ठंढे बास्ते में दाल दिया !
 मामला जनपद कें विकास खंड कटरा क्षेत्र कें अंतर्गत ग्राम पारसिया रानी का है , जंहाँ कें निवासी शिकायतकर्ता भग्गन प्रसाद ने नवम्बर 2018 में जिलाधिकारी एंव मुख्य विकास अधिकारी क़ो ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा की जा रहीं व्यापक वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायत शपथपत्र नोटरी पर उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में निहित प्रावधानों कें अंतर्गत शिकायत करके जांच कराये जाने की याचना की थी जिसमे जिलाधिकारी ने 26 नवम्बर 2018 क़ो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोंडा क़ो जांच अधिकारी नामित करके एक माह में आख्या / रिपोर्ट उपलब्ध कराए जाने संबंधी आदेश पारित क़िया था, जिसमे नियत समय बीत जाने कें उपरांत मामलें का मीडिया में प्रकाशन होने कें बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बिना जांच किए हुए व्यवस्तता का हवाला देकर पत्रावली क़ो वापस कर दिया था , जिसमे तत्कालीन जिलाधिकारी प्रभाशू कुमार श्रीवास्तव ने जांच मुख्य पशु चिकित्साधिकारी क़ो स्थानांतरित करके एक माह में स्थलीय एंव अभिलेख़िय जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट उपलब्ध कराये जाने का आदेश पारित क़िया था, जिसमे शिकायकर्ता कें कई बार अनुस्मारक भेजने कें बाद आज तक उक्त प्रकरण में कोई भी जांच नही की गयी है ना ही कोई कार्यवाही की गयी है
यंहा यह भी बताना आवश्यक व उचित प्रतीत हो रहा है की उक्त ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना कें अंतर्गत व्यापक वित्तीय अनियमितताओं का मामला भी प्रकाश में आया था जिसमे ग्रामवासियों ने शपथपत्र नोटरी पर जिलाधिकारी एंव मुख्य विकास अधिकारी से की थी जिसमे तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार ने उपायुक्त स्वतः रोजगार क़ो जांच अधिकारी नामित करके 10 दिवस में आख्या मांगी थी जिसमे 6 माह बीत जाने कें उपरांत आज तक कोई भी जांच सम्पादित नही की गयी है । शिकायकर्ता का आरोप है की प्रधान राजनैतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति है और आर्थिक रूप से काफी सक्षम है जिससे जांच अधिकारी मोटी धन उगाही करके मामलें क़ो शिथिल कर देते है, तथा शिकायत करने वालो का नाजायज उत्पीड़न करवाता है ।

प्रकरण पर क्या कहते हैं अधिवक्ता एंव सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित 

मामलें की लगातर पैरवी की जा रहीं है , पूर्व मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार व तत्कालीन जिलाधिकारी प्रभाशू कुमार श्रीवास्तव ने मामलें क़ो गम्भीरता से लिया था और जांच कें लिय आदेश पारित करके जांच अधिकारी नामित कर दिया था परन्तु उक्त दोनो अधिकारियो कें स्थानांतरण कें बाद से मामले में दीमक लग गया और पत्रावली शिथिल होकर ठंढे बस्ते में चली गयी , अभी हाल में मीडिआ के माध्यम से जानकारी मिली है की मनरेगा कें अंतर्गत कुछ ग्रामसभा क़ो चिन्हित क़िया गया है जिसमे काफी अनियमितताओं का मामला प्रकाश में आया है जिसमे एक ग्राम पंचायत पारसिया रानी भी है जिसमे अनेको ग्रामवासियों ने 7 माह पूर्व शपथपत्र देकर शिकायत किया था और आरोप लगाया था की बिना किसी काम कें हम लोगो कें खाते में पैसा आता है और प्रधान द्वारा उसको निकलवा लिया जाता है, बैंक जाकर पैसा निकालकर देने पर हर्जा खर्चा कें नाम पर कुछ अंश उनको प्रधान द्वारा दे दिया जाता है ।
उन्होंने कहा की ग्रामीणों का उक्त बयान जहाँ एक और मनरेगा में व्याप्त भ्रस्टाचार की पोल खोल रहा है वहीँ दूसरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार किये जा रहे ”न खाऊंगा और न खाने दूंगा” के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहा है !