अपराध उत्तर प्रदेश गोंडा

“आखिर SDM सदर गोंडा क़ो अपने स्टोनो से इतनी मोहब्बत क्यो है”

Written by Vaarta Desk

आखिर SDM सदर गोंडा क़ो अपने स्टोनो से इतनी मोहब्बत क्यो है” कहीं साग सब्जी एंव फल पहुँचाने का नमक तो तो नही अदा कर रहे है ?

गोंडा । उपजिलाधिकारी सदर इस बीच अपने कारनामों से अक्सर मीडिया में बने रहे है वही इनका एक और करनामाँ सामने निकल कर आया है जिसमे शिकायकर्ता अधिवक्ता पंकज दीक्षित का आरोप है कि फरवरी 2018 में जिलाधिकारी गोंडा क़ो एक शिकायती पत्र दिया था जिसमे कई माह बीत जाने कें बाद भी कोई कार्यवाही का पता नही चला तो शिकायकर्ता पंकज दीक्षित उपजिलाधिकारी सदर गोंडा कें कार्यालय पहुँच कर प्रार्थनापत्र में की गयी कार्यवाही से अवगत होना चाहे तो वंहा पर तैनात स्टोनो आर.ए .यादव ने की गयी कार्यवाही से अवगत कराने कें लिए 200 रूपए की मांग की तथा विरोधाभास व्यक्त करने पर सूचना व जानकारी देने से इनकार कर दिया था ।

उक्त कें संबंध में शिकायकर्ता पंकज दीक्षित ने उपजिलाधिकारी से इसकी शिकायत भी की,  फिर भी की गयी कार्यवाही की प्रतिलिपि नही दिलायी गयी , तब प्रार्थी ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या – 40018319013911 दिनांक 15-06-2019 क़ो दर्ज की थी जिसमे उपजिलाधिकारी सदर नितिन गौड़ बिना शिकायतकर्ता का पक्ष सुने , बिना प्रतिलिपि (जानकारी) उपलब्ध कराये बगैर मामले का निस्ताराण मात्र स्टोनो द्वारा तयार की फ़र्जी रिपोर्ट कें आधार पर कर दिया , इससे विषय वस्तु स्पष्ट है की उक्त भ्रष्ट स्टोनो क़ो उपजिलाधिकारी सदर गोंडा का संरक्षण प्राप्त है । गौरतलब तथ्य यह है की स्टोनो ने खुद निस्तारण स्पष्टीकरण पत्र पर इस बात का उल्लेख क़िया है शिकायकर्ता/पीड़ित क़ो उसके प्रार्थना पत्र पर की गयी कार्यवाही की प्रतिलिपि उसको कार्यालय द्वारा निःशुल्क नही दी जाती है बल्कि जनसूचना अधिनियम कें अंतर्गत प्राप्त करने कें लिए निर्देशित किया जाता है । तथा एक और फ़र्जी तथ्य का ऊल्लेख क़िया है की अपने मुअक्किल कें पक्ष में आदेश हेतु दबाव बनाने लगे जबकि इस संबध में श्री दीक्षित का कहना है मेरे किसी भी मुवक्किल का कोई भी वाद उपजिलाधिकारी कोर्ट पर विचाराधीन नही है न ही ऎसी किसी बात का भ्रष्ट स्टेनो कें पास साक्ष्य है जबकि शिकायकर्ता कें पास अनेको साक्ष्य मौजूद है जो स्टेनो कें भ्रष्ट आचरण की पोल खोलते है ।

क्या कहते है शिकायकर्ता पंकज दीक्षित 

गोंडा जनपद में पूर्व उपजिलाधिकारी एन त्रिपाठी कें जाने कें बाद शिकायतकर्ताओ , पीड़ितो , वादकारियों , अधिवक्ताओं तथा पत्रकारो क़ो वर्तमान उपजिलाधिकारी नितिन गौड़ से कोई भी उचित न्याय नही मिल पा रहा है , मै इसका जीता जागता उदाहरण हूँ , अपने ही शिकायत में शिकायती की स्थित जानने कें लिए 200 रूपए मांगा जा रहा है और अदा न करने पर भ्रष्ट स्टोनो जन सूचना अधिनियम का पाठ पढ़ा रहा है जबकि शिकायकर्ता क़ो उसके व्यक्तिगत मामलें की जानकारी कें लिए प्रतिलिपि निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है , जनसूचना अधिनियम तो लोक दस्तावेज प्राप्त करने कें लिए बनाया गया कानून है । एक और कहानी भ्रष्ट स्टोनो ने मढ़ दिया है की अपने मुवक्किल कें पक्ष में आदेश हेतु दबाव बना रहे थे जिस सम्बन्ध में मै दावे कें साथ कहता हूँ की प्रार्थी कें किसी भी मुवक्किल का कोई भी वाद उपजिलाधिकारी कोर्ट में लंबित ही नही है , और यदि होंगा भी तो आदेश का दबाव स्टोनो पर बनाने का कोई औचित्य नही है , इस कथन से आहत होकर गुप्त रूप से पड़ताल क़िया तो पता चला कि आदेश हेतु धन उगाही का काम स्टोनो क़ो एस.डी.एम.साहब ने सौंप रखा है तो स्टोनो ने फ़र्जी कहानी रच दी उसको यह नही पता रहा होंगा कि मेरे किसी मुवक्किल का कोई वाद लंबित ही नही है । मै यह नही समझ पा रहा हूँ कि एस.डी.एम.नितिन गौड़ स्टोनो आर.ए.यादव कें अधीनस्थ कार्य कर रहे है या आर.ए.यादव एस.डी.एम नितिन गौड़ कें अधीनस्थ कार्य कर रहे है क्योकि शिकायकर्ता की शिकायत पर फ़र्जी रिपोर्ट स्टोनो द्वारा तयार करके उस पर उपजिलाधिकारी सदर ने आँख मूंदकर हस्ताक्षर करके अग्रसारित कर दिया है और शिकायत का पटानाश कर दिया है । यह संघर्ष कोई मेरा व्यक्तिगत नही है मै इसके लिए मजबूती कें साथ जंग लड़ूंगा और शिकायकर्ता क़ो निःशुल्क उसके प्रार्थना पत्र पर की गयी कार्यवाही की प्रति निःशुल्क दिलाकर कानून का पालन कराना सुनिश्चत कराऊंगा तथा भ्रष्ट एंव कुप्रशासन कें विरुद्ध जल्द ही लोकायुक्त में परिवाद दाखिल करूंगा क्योकि यह मामलें कुप्रशासन एंव भ्रष्टाचार से संबंधित है ।