अज़ब ग़ज़ब

ऐसा देश जहां गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल करने के लिए महिलाओं को लेनी पडती है इजाजत

औरत की निजता और बुनियादी अधिकारों की हम कितनी भी चर्चा भले कर लें लेकिन दुनिया में अभी भी ऐसे देश हैं जहाँ महिलाओं को अपने पति की अनुमति के बगैर गर्भ निरोधकों तक के प्रयोग की आजादी नहीं हैं. परिवार नियोजन को अपनाना तो दूर की बात इस देश में बच्चों के बीच एक मुनासिब अंतर के लिए सामान्य गर्भ निरोधक साधनों को अपनाने के लिए भी महिलाओं को अपने पति की लिखित इजाज़त लेनी पड़ती हैं.

जी हाँ हम बात कर रहे हैं अफ्रीकी के पूर्वी-छोर पर बसे देश रवांडा की जहां की महिलाएं आज भी चर्च की अन्धविश्वासी परंपरा का शिकार हैं. तकरीबन सवा करोड़ की आबादी वाले इस छोटे देश के मूल निवासी यूं तो घिग्गी आदिवासी हैं लेकिन सामजिक परंपराओं में यहाँ अभी भी कैथोलिक चर्च का दबदबा कायम हैं. रवांडा में आज भी किसी भी महिलाओं के छ: बच्चे होना सामान्य बात हैं.

‘ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजी’ द्वारा परिवार नियोजन को लेकर रवांडा में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक यहाँ परिवार नियोजन सम्बन्धी जागरूकता कार्यकर्मों में पुरुषों को शामिल कराना एक टेढ़ी खीर है. इसलिए अब हेल्थ वर्कर्स ने महिलाओं को परिवार नियोजन सन्देश और व्यावहारिकता समझाने के लिए बाइबिल का सहारा लेना शुरू किया है. हालांकि स्थानीय कैथोलिक पादरी बाइबिल के उन अंशों की व्याख्या का भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं, जिनमें नियोजित परिवार को सुखी- स्वस्थ एवं समूह परिवार का आधार बताया गया है.

रवांडा की हेल्थ वर्कर्स बाइबिल के फर्स्ट टिमोथी चैप्टर 5 की वर्स-8 का हवाला देती हैं जिसमें बच्चों को अच्छी शिक्षा, उत्तम पालन-पोषण और बेहतर जीवन चर्चा सुलभ कराना माता-पिता की बुनियादी जिम्मेदारी बताया गया हैं. जो परिवार में ज्यादा बच्चे होने की दशा में संभव नहीं है. इसीलिए रवांडा के परम्परावादी समाज के जिन वर्गों में शिक्षा का प्रभाव बढ़ रहा है वहां के पुरुषों के बीच महिलाओं को गर्भ निरोधक साधनों के प्रयोग की लिखित इज़ाज़त देने का चलन बढ़ा है लेकिन अभी भी चर्च के प्रभाव वाली एक बड़ी आबादी ऐसी है, जहां आज भी महिलाएं गर्भ निरोधक साधनाओ के इस्तेमाल से कोसों दूर हैं.