पड़ रहे आवेदन पर आवेदन लेकिन अधिकारियों के कान पर नहीं रेंग रही जूँ
जानकारी मांगने पर भड़के अधिकारी मीडिया को पढ़ा रहे ज्ञान का पाठ

गोण्डा। पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके खड़ंजे के पुनः निर्माण के लिए पिछले एक वर्ष से जिम्मेदारों को पत्र पर पत्र लिखें जा रहे लेकिन खानापूर्ति के लिए जाँच और आख्या का खेल खेलते हुए प्रशासन निर्माण तो दूर शिकायत को ही ठंडे बस्ते में डालने के प्रयास में जुटा हुआ है यही नहीं एक जिम्मेदार तो जानकारी मांगने पर पर अपना आपा खोते हुए भी दिखाई दे रहे हैं तो दूसरे छुट्टी पर होने की बात बता बात करने से ही परहेज करते दिखाई दे रहे है, जिम्मेदारों का ये रवैया कही न कहीं इस बात की ओर संकेत कर रहा है की ये मामला मात्र खड़ंजा निर्माण का नहीं बल्कि राजनैतिक उठापटक का भी है, खास बात तो ये है की पूरी तरह ध्वस्त हो चुका ये खड़ंजा अबतक दो लोगो की मौत का कारण और कइयों के घायल होने का कारण भी बन चुका है।

ग्राम सभा वासियों के ही नहीं बल्कि गोण्डा उतरौला मार्ग पर चलने वाले सभी नागरिकों के लिए भयानक बन चुका ये खड़ंजा मार्ग ग्राम महादेवा अंतर्गत रामनगरा की ओर जाता है गोण्डा उतरौला मुख्य मार्ग से सटा ध्वस्त हो चुका ये खड़ंजा सड़क से लगभग आठ फ़ीट नीचे हो गया है मुख्य मार्ग पर पैदल, साईकिल या मोटरसाईकिल से चलने वाले सवार इसके किनारे कभी भी दुर्घटना का शिकार बन सकते हैं।

अपने शुरुआत में एक बड़े गड्ढे का रूप ले चुका ये खड़ंजा रामनगरा में संचालित प्राथमिक पाठशाला तक जाता है जिसमे पढ़ने वाले सैकड़ो बच्चों सहित रामनगरा वासियों का भी आवागमन का मुख्य रास्ता यही खड़ंजा है जिसकी स्थिति ऐसी है की कभी भी कोई बड़ी घटना सामने आ सकती है, खड़ंजे के निर्माण के लिए स्थानीय ग्रामवासी पिछले एक वर्ष से प्रयास कर रहे हैं की इसका निर्माण हो जाये लेकिन प्रधान सहित अन्य जिम्मेदारों ने जैसे रामनगरा सहित गोण्डा उतरौला मार्ग पर चलने वाले सामान्य लोगो से जैसे कोई दुश्मनी पाल रखी हो की निर्माण नहीं होने देंगे चाहे किसी की जान ही क्यों न चली जाये।
बीते बरसात में इन जिम्मेदारों की ये इच्छा भी उस समय पूरी हुई ज़ब अकेलवा निवासी जमुना प्रसाद गुप्त सहित एक अन्य की मौत का कारण ये खड़ंजा बना यही नहीं दो अन्य इसी कारण से बुरी तरह घायल भी हुए लेकिन फिर भी आजतक निर्माण नहीं किया गया।
हैरानी की बात तो ये है की की गईं शिकायतों और उनपर की गईं कार्यवाई की बात सुनते ही जिम्मेदार कुछ इस तरह बिदकते है जैसे कुत्ते के पिछवाड़े पेट्रोल लगा दिया गया हो जिसका प्रमाण तब मिला ज़ब सम्पूर्ण समाधान दिवस पर की गईं शिकायत पर अपनी आख्या देने वाले ए डी ओ पंचायत भूदेव सिंह खड़ंजे का नाम सुनते ही बिदक गए और मीडिया को ही ज्ञान का पाठ पढ़ाने लगे।

यही नहीं ज़ब खंड विकास अधिकारी पंडरी ओमप्रकाश सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्हें भी खड़ंजे का नाम सुनते ही स्वयं का छुट्टी पर होना याद आ गया और दो दिन बाद बात करने की बात कहते हुए फोन काट दिया।
खंड विकास अधिकारी और ए डी ओ पंचायत भूदेव सिंह के हैरानी भरे रवैये ने इस आशंका को तो प्रमाणित कर दिया की खड़ंजे का निर्माण फिलहाल तो अभी होने से रहा चाहे दर्जनों की जान आगे क्यों न चली जाये, साथ ही इस बात को भी प्रमाणित कर दिया की ये कोई साधारण खड़ंजा नहीं है इसके पीछे कुछ राजनैतिक स्वार्थ और मतभेद जुड़े हैं जो इसका निर्माण नहीं होने देना चाहते।

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