अपराध उत्तर प्रदेश

डिमोशन के बाद भी क्यों बर्खास्त हुआ करोड़पति लेखपाल, आयुक्त को की गईं अपील भी नहीं आई काम

Written by Vaarta Desk

प्रॉपर्टी डीलर की तरह काम कर रहा था महाभ्रस्ट लेखपाल 

जिलाधिकारी और आयुक्त ने दी भ्रस्टाचारियों को नसीहत 

कानपुर। अपने पद का दुरूपयोग कर करोड़ों की संपत्ति खड़ा करने वाले लेखपाल पर प्रशासन ने हंटर चलाते हुए भ्रस्ट कर्मचारियों को सुधरने की नसीहत दी है, खास बात तो ये है की जिलाधिकारी द्वारा किये गए डिमोशन पर की गईं अपील को निरस्त करते हुए आयुक्त ने लेखपाल को बर्खास्त भी कर दिया।

जिलाधिकारी और आयुक्त द्वारा भ्रस्टाचार पर की गईं इस चोट की चर्चा पूरे जिले में चल रही है, जानकारी के अनुसार मामला जिले में राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनात अलोक दुबे नाम के कर्मचारी से जुड़ा है जिस पर आरोप था की उसने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए एक प्रॉपर्टी डीलर की भूमिका निभाते हुए करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर रखी है, जिलाधिकारी द्वारा कराये गए जाँच में आरोपों की पुष्टि हुई जिसपर कार्यवाई डी एम ने अलोक दुबे को क़ानून गो से लेखपाल बना दिया।

अलोक दुबे ने जिलाधिकारी के कार्यवाई के विरोध में मंडलायुक्त कानपुर मण्डल विजयेंन्द्र पण्डियन के यहाँ अपील की लेकिन मंडलायुक्त ने भ्रस्टाचार पर जिलाधिकारी के उठाये गए कदम से एक कदम और आगे बढ़ते हुए क़ानून गो से लेखपाल बने अलोक दुबे को पद से ही बर्खास्त कर दिया।

जिलाधिकारी कानपुर नगर और मंडलायुक्त द्वारा लिए गए निर्णय की जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में सराहना की जा रही है और इसे भ्रस्टाचार के विरुद्ध लड़ी जा रही लड़ाई में बड़ी जीत भी मानी जा रही है लोगो का कहना है की यदि जिले और मण्डल के जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह कार्यवाई करते रहेंगे तो भ्रस्टाचार को समाप्त करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्त को इस प्रकरण से सीख लेते हुए अपने कार्यक्षेत्र में ऐसी कार्यवाई को अपनाना चाहिए।

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