उत्तर प्रदेश गोंडा स्वास्थ्य

थमें कदम बढ़ा रहे, फाइलेरिया उन्मूलन की रफ्तार -अपनी तकलीफ सुनाकर बता रहे—फाइलेरिया है लाइलाज

गोंडा। जनपद में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चल रहे सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान में इस बार बदलाव की एक नई तस्वीर दिख रही है। घर-घर फाइलेरिया से बचाव की दवा सेवन कराने पहुंच रही आशा कार्यकर्ताओं के साथ अब वे लोग भी हैं, जो खुद फाइलेरिया से पीड़ित हैं। बेलसर, पडरी कृपाल, मसकनवा और नवाबगंज ब्लॉकों के 49 मरीज, सीएचओ के नेतृत्व में गठित रोगी हितधारक मंच से जुड़कर लोगों को अपनी आपबीती सुनाते हैं—कैसे इस बीमारी ने उनकी जिंदगी बदल दी, और क्यों दवा खाना जरूरी है।

जिला संचारी रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. सी.के. वर्मा बताते हैं कि जिले में फाइलेरिया के 2065 मरीज चिन्हित हैं। इनमें से चार ब्लॉकों के 49 मरीज अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ पंचायत सदस्य, कोटेदार, शिक्षक, महिला समूह, प्रभावशाली लोग और आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहित 275 से अधिक लोग संकोची परिवारों को दवा सेवन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इन्हीं में से एक बेलसर ब्लॉक के भमैचा गांव की 45 वर्षीय बबिता सिंह हैं। दो बच्चों की मां और डबल एमए पास बबिता लगभग 15 वर्षों से फाइलेरिया (पैर में सूजन) से जूझ रही हैं। इलाज, डॉक्टरों और पारंपरिक तरीकों के बावजूद उनके पैरों की सूजन में कोई कमी नहीं आई। अचानक आई इस बीमारी ने न केवल उनके कदमों की रफ्तार रोक दी, बल्कि सेना या पुलिस में भर्ती होने के सपने भी छीन लिए। बबिता बताती हैं कि शुरुआती दिनों में लाखों रुपये प्राइवेट इलाज में खर्च किये, बाद में उन्हें सरकारी अस्पताल से दवा और एमएमडीपी किट मिली। डॉक्टरों ने साफ कहा कि फाइलेरिया लाइलाज है, बस सावधानी, सफाई और व्यायाम से इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है।

हाल ही में जिले में आयोजित फाइलेरिया उन्मूलन मीडिया वर्कशॉप में बबिता ने अपनी कहानी सुनाई। उनकी सच्चाई, साहस और साफगोई ने अधिकारियों और पत्रकारों को प्रभावित किया। डॉ. सी.के. वर्मा ने कहा—बबिता जैसी महिलाएं हमारे लिए असली प्रेरणा हैं, जो अपने दर्द को हथियार बना लेती हैं। अब बबिता का सपना पुलिस या सेना में जाना नहीं, बल्कि अपने गांव और आसपास से फाइलेरिया को पूरी तरह खत्म करना है। वह कहती हैं— अगर मेरी तकलीफ किसी के लिए चेतावनी बन जाय और उन्हें बीमारी न हो तो यह मेरे लिए किसी मेडल से कम नहीं है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार 28 अगस्त तक विशेष अभियान चला रही है, लेकिन जागरूक तो हमें ही होना पड़ेगा। बीमारी को मिटाने के लिए हम सबको फाइलेरिया से बचाव की दवा एक साथ खानी होगी।

सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि मच्छरों से फैलने वाली फाइलेरिया की रोकथाम के लिए 28 अगस्त तक, मनिकापुर, रूपईडीह, तरबगंज और वजीरगंज को छोड़कर शेष 12 ब्लॉकों में 28.81 लाख से अधिक लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जा रही है। गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमार व्यक्तियों और दो वर्ष से छोटे बच्चों को छोड़कर सभी को दवा अवश्य लेनी चाहिए।

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राजेंद्र सिंह

राजेंद्र सिंह (सम्पादक)

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