उत्तर प्रदेश गोंडा स्वास्थ्य

घंटो पहले अस्पताल प्रशासन को हो गईं थी डी एम के औचक निरिक्षण की जानकारी, कमियों को दुरुस्त दिखाने की लग गईं थी दौड़

औपचारिकता भर रहा जिलाधिकारी का निरिक्षण 

गोण्डा। ये कैसा औचक निरिक्षण जिसकी जानकारी पहले से ही संस्थान को हो जाये, पटरी से उतरी व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त कर लिया जाये, निरिक्षणकर्ता को सब ठीक दिखाया जाये और उसे सब दुरुस्त भी लगे, संस्थान की बड़ी समस्याओं की ओर न निरिक्षणकर्ता ध्यान दे और न ही संस्थान के जिम्मेदार ध्यान दिलाने का प्रयास करें, कुछ ऐसा ही रहा आज का नवागत जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन का ज़िला अस्पताल का कथित औचक निरिक्षण।

आधिकारिक तौर पर तो इस निरिक्षण को औचक कहा जा रहा हैं लेकिन वास्तविकता तो ये है की जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन द्वारा आज जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के निरिक्षण की जानकारी अस्पताल प्रशासन को घंटो पहले ही हो गईं, बहुत सी अनियमितताओं को छुपा दिया गया, स्टॉफ और अधिकारियों के एप्रेन जो शायद ही कभी निकालते हो उन्हें जल्दी जल्दी पहना दिया गया, धूल गन्दगी से पटे अस्पताल के फर्श पर झाड़ू और पोछा लगना शुरू हो गया।

पूरे बरसात के समय तालाब का शक्ल अख्तियार किये परिसर और दशकों से पूरे वर्ष तालाब का रूप रखें पम्प हॉउस के एक बड़े क्षेत्र की ओर न तो जिलाधिकारी ने अपने कदम बढ़ाये और न ही अस्पताल प्रशासन ने इस बड़ी समस्या की ओर जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। लगभग चार माह से कोविड भवन के ख़राब एक्सरे मशीन की भी सुध नहीं दिलाई गईं होगी।

फिलहाल अब इस औचक निरीक्षण की औपचारिकता भी निभा दी जाये। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया और मौके पर उपस्थित अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल एक संवेदनशील स्थान है, जहां सफाई की व्यवस्था सर्वोपरि होनी चाहिए। गंदगी या अव्यवस्था की स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगी।

जिलाधिकारी ने मरीजों के बैठने की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और निर्देश दिया कि प्रतीक्षालयों एवं ओपीडी क्षेत्रों में पर्याप्त बैठने की सुविधा सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों व उनके परिजनों को अनावश्यक असुविधा न हो।

इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों को बाहर से दवा या जांच लिखने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। सभी आवश्यक दवाएं एवं परीक्षण अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराए जाएं और मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि शासन द्वारा मरीजों के हित में जो भी योजनाएं एवं सुविधाएं निर्धारित की गई हैं, उनका लाभ मरीजों तक पूरी तरह से पहुंचना चाहिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार द्वारा निःशुल्क दवाएं, जांच सुविधाएं, जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक सेवाएं दी जा रही हैं, जिनकी जानकारी हर मरीज को दी जानी चाहिए और उन्हें इसका समुचित लाभ भी मिलना चाहिए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि इन योजनाओं की जानकारी पोस्टर व पंपलेट के माध्यम से अस्पताल परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए।

जिलाधिकारी ने सभी को चेताया कि लापरवाही या उदासीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, सीएमएस, मेडिकल स्टाफ व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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राजेंद्र सिंह

राजेंद्र सिंह (सम्पादक)

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