मनकापुर (गोण्डा)। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के हालात बदलने का नाम नहीं ले रहे, बात सफाई की करें तो पचास हज़ार वेतन पाने वाले सफाईकर्मी की नियुक्ति के साथ कूड़े के लिए वाहन और लाखों की लागत से निर्मित अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र सरकार के प्रयासों को मुँह चिढ़ाते दिखाई दे रहे हैं जिसका एकमात्र कारण गाँव के प्रधान और सफाईकर्मी का भ्रस्ट गठजोड़ बना हुआ है।
ऐसे ही एक भ्रस्ट गठजोड़ का उदाहरण पिछले दिनों विकासखंड मनकापुर के ग्रामसभा जोगापुर में दिखाई दिया जहाँ गाँव में चारों ओर गन्दगी का साम्राज्य व्याप्त था, सड़के और नालियाँ तो दूर प्रशासनिक केंद्र पंचायत भवन तक गन्दगी से पटा पड़ा था। जिसके कारण का पता करने के लिए ज़ब प्रधान से संपर्क किया गया तो लगभग सभी ग्रामसभाओं की तरह यहाँ भी अपने को प्रधान का प्रतिनिधि बताने वाला अखिलेश कुमार द्विवेदी नाम का व्यक्ति सामने आ खड़ा हुआ।
फिलहाल प्रश्नों के उत्तर में श्री द्विवेदी ने मुँह ज़बानी तो सफाई व्यवस्था को लेकर सफाईकर्मी राकेश तिवारी को बहुत भला बुरा कहा और कई बार सफाईकर्मी की शिकायत भी किये जाने की बात कही, लेकिन ज़ब उनसे शिकायत की कॉपी चाही गईं तो बात से पलटते हुए शिकायत मौखिक किये जाने की बात बताई।
वहीं ज़ब सफाईकर्मी राकेश तिवारी से गाँव की सफाई की स्थिति जानने का प्रयास किया गया तो उसने सारी जिम्मेदारी प्रधान पर डालते हुए कहा की प्रधान जी सब जानते हैं।
दोनों तरफ से मिले उत्तर और अपनी टोपी दूसरे के सिर डालने की इस हैरानजनक स्थिति का खामियाजा आज नहीं तो कल ग्रामीणों को उठाना पड़ सकता है जो कभी भी महामारी के रूप में गाँव के सामने खड़ी हो सकती है, हाँ यदि समय रहते प्रशासन और शासन ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के प्रयास के तहत ऐसे सफाईकर्मियों और कथित प्रधान प्रतिनिधियों पर लगाम कस ली तो शायद गांव वासियों को महामारी से बचाया जा सकें।
