गोंडा। वर्तमान समय में शैक्षणिक संस्थानों सहित अन्य स्थानों में तनाव और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को परस्पर समझ एवं संवेदनशीलता से सुलझाया जा सकता है। ये विचार केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ हरियाणा में मनोविज्ञान विभाग के सह आचार्य डॉ. रवि प्रताप पाण्डेय ने व्यक्त किए। “विद्यार्थी कल्याण हेतु सहपाठी सहयोग प्रणाली” पर आयोजित जागरूकता सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने कहा कि इस समय डिजिटल कार्य-व्यवहार नशे की तरह बढ़ रहा है। लोग देर रात तक जागकर रील देखते रहते हैं, परिणामतः नींद प्रभावित होती है। नींद प्रभावित होने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रही है। संवाद सत्र में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में करियर की स्पर्धा, कार्याधिक्य, सामाजिक-पारिवारिक अपेक्षाएँ और अव्यवस्थित जीवन शैली तनाव और अवसाद को जन्म दे रही हैं। इसके लिए समझदार और संवेदनशील तथा परानुभूति रखने वाले सहपाठी और शिक्षक अपने आसपास रहने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर उस तनाव को समाप्त करने या कम करने का काम कर सकते हैं।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. बी. पी. सिंह ने इस अवसर पर व्यावसायिक गतिविधि में तनाव-प्रबंधन के गुर बताए। आमंत्रित अतिथि सहित सबका स्वागत भी उनके द्वारा किया गया।
मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. ममता शर्मा ने विषय की प्रस्तावना स्पष्ट की। उन्होंने तनाव के प्रबंधन में मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं की भूमिका को समझाया।
आइक्यूएसी के समन्वयक प्रो. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तनावपूर्ण शैक्षिक वातावरण में केवल अकादमिक उत्कृष्टता पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है, किंतु उसे व्यवहारिक पहल में बदलना समय की आवश्यकता है।

मुख्य नियंता प्रो. अमन चंद्रा ने सहपाठी सहयोग प्रणाली (Peer Support System) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार विद्यार्थी अपनी समस्याएँ शिक्षक या परामर्शदाता से साझा करने में संकोच करते हैं, लेकिन सहपाठी के साथ सहज संवाद स्थापित कर पाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित सहपाठी विद्यार्थियों के लिए भावनात्मक सहारा बन सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित मार्गदर्शन तक पहुँचा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से मानसिक समस्याओं से संबंधित प्रश्न पूछकर समाधान प्राप्त किए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील रहें, आवश्यकता पड़ने पर संवाद करें और सहयोग को कमजोरी नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति के रूप में देखें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. जय शंकर तिवारी ने किया।
इस अवसर पर प्रो. राजीव अग्रवाल, प्रो. श्रीनिवास राव, प्रो. अरविंद शर्मा, डॉ. पूजा यादव, डॉ. ममता शुक्ल, डॉ. वंदना भारतीय, डॉ. राज बहादुर चौधरी, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. अनुपमा आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।
