अपराध उत्तर प्रदेश गोंडा लाइफस्टाइल

राहत की जगह ठगी योजना चला रहा विद्युत् विभाग, पूर्ण भुगतान के बाद भी थमा रहा लम्बा बिल

मीटिंग में व्यस्त अधिकारियों को नहीं जनता की समस्या से सरोकार, दर दर भटक रहे उपभोक्ता 

मुख्यमंत्री से लगाई जा रही गुहार 

गोण्डा। कहने को तो विद्युत् उपभोक्ताओं को बकाये बिजली बिल के भुगतान में राहत देने के लिए विभाग और शासन द्वारा राहत योजना चलाई जा रही है लेकिन ये राहत योजना विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही और भ्रस्टाचार के चलते उपभोक्ताओं के लिए ठगी योजना साबित हो रही है, बकाये से मुक्ति पाने की लालसा में जोड़ तोड़ कर पैसों की व्यवस्था कर भुगतान करने के बाद भी मिले लम्बे बिल को देखकर उन्हें अपने को ठगे जाने का अहसास हो रहा है, उसपर विभागीय अधिकारियों का रवैया उन्हें और परेशानी में डाल रहा है, थके हारे उजभोक्ताओं ने पूरे मामले को मुख्यमंत्री के सज्ञानं में लाने का निर्णय लिया है।

आपको बताते चले की पूरे प्रदेश में भारी भरकम विद्युत् बकाये को समाप्त करने के लिए शासन ने बिजली बिल राहत योजना चला रखी है जिसके माध्यम से बकाये में मिल रहे भारी छूट को देखते हुए लोगों में येन केन प्रकरेन कहीं न कही से पैसे की व्यवस्था कर इस सरदर्द से उबरने की चाहत जगी और लोगो ने अपने बिजली बिल का निस्तारण भी कराया लेकिन उन्हें मायूसी और अपने को ठगे जाने का अहसास तब हुआ ज़ब अगले ही माह उन्हें फिर से एक लम्बा चौड़ा बिल थमा दिया गया।

ठगे जाने का ये अहसास उनका तब और भी गहरा हो गया ज़ब उनके द्वारा अधिकारियों से संपर्क किये जाने पर उनकी ओर से कोई संतोषजनक उत्तर मिलने की जगह बिल को जमा करने का ही दबाव बनाया गया। इसी तरह का एक मामला विगत 22 दिसंबर को किये गए भुगतान में सामने आया।

पीड़ित उपभोक्ता के अनुसार योजना का लाभ उठाने के लिए ज़ब शहर के बड़गाव उपकेंद्र के उपखण्ड अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुल बकाया लगभग 84 हज़ार बताते हुए कहा की योजना के अंतर्गत लगभग 40 हज़ार रुपये जमा करने होंगे और बकाये से पूर्ण मुक्ति मिल जाएगी।

मेहनत और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले युवक ने इस बड़े समस्या से छुटकारा पाने की इच्छा से अपने परिचितों से ब्याज पर पैसे की व्यवस्था कर उपखण्ड अधिकारी द्वारा बताई गईं धनराशि कार्यालय में जमा कर “राहत” की सांस ली लेकिन उसकी राहत की सांस गले में उस समय अटक गईं ज़ब मीटर की रीडिंग लेने पहुंचे कर्मचारी ने युवक को 10000 का बिल फिर से थमा दिया।

बिल देखकर हक्के बक्के युवक ने उपखण्ड अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कई प्रयास के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया और इसी बीच वे छुट्टी पर भी चले गए।

वहीं ज़ब विभाग के इस ठगी योजना के कारनामें पर वार्ता के लिए अधिशाषी अभियंता और मुख्य अभियंता से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो पता चला “साहब” लोग वीडियो कॉन्फ्रेंस में व्यस्त हैं, व्हाट्सप्प के माध्यम से प्रकरण से अवगत कराते हुए अधिकारियों से उत्तर की अपेक्षा की गईं तो अधिशाषी अभियंता से जो जवाब मिला वो चौकाने वाला था, उन्होंने बताया की ये बिल पिछले छह माह का है, ज़ब उनसे ये पूछा गया की क्या “राहत” योजना के तहत भुगतान स्वीकार करते समय उपभोक्ता को ये बताया गया था की अभी छह माह का बिल बकाया रहेगा तथा बकाये की जानकारी करते समय छह माह पीछे का बकाया क्यों बताया गया तो अधिशाषी अभियंता ने चुप्पी साध ली।

वहीं मण्डल के विभागीय सर्वेसर्वा और सोशल मीडिया पर भयंकर रूप से सक्रिय रहने वाले मुख्य अभियंता ने उपभोक्ता की समस्या को ही अनदेखा कर अपनी जमीनी उदासीनता का पूर्ण परिचय दे दिया।

अपनी समस्या से पीड़ित और अधिकारियों के रवैये से आहत युवक ने मीडिया से बात करते हुए कहा है की यदि एक सप्ताह में उसकी समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता है तो वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी शिकायत पहुचायेगा।

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राजेंद्र सिंह

राजेंद्र सिंह (सम्पादक)

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