अधिवक्ताओं द्वारा पूर्व सांसद के पैर छूने को लेकर शुरू हुआ विवाद
महामंत्री ने जारी किया कारण बताओं नोटिस तो अध्यक्ष ने नोटिस को बताया अवैध
गोण्डा। कुछ अधिवताओं द्वारा भाजपा के पूर्व सांसद और पूर्व कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के न्यायालय परिसर में वर्दी में पैर छूने को लेकर विवाद हो गया, अधिवक्ताओं ने गलत किया या सही इसके निपटारे की जगह जारी किये गए नोटिस को लेकर बार के महामंत्री और अध्यक्ष के बीच तलवार खिंच गईं।
बताते चले की कुछ दिन पूर्व पूर्व सांसद न्यायालय परिसर पहुंचे जहाँ वकीलों की एक टीम ने उनका स्वागत करते हुए करबद्ध होते हुए उनके पैर छुए, पैर छूने के समय वकील अपनी पूर्ण वेशभूषा में थे जिसे लेकर ज़ब विरोध शुरू हुआ तो बार के महामंत्री मनोज कुमार मिश्र ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विनय कुमार सिंह, शिवम् सिंह, मनोज कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह सहित दो अन्य अधिवक्ताओं को नोटिस जारी करते हुए पूछा की आप सभी द्वारा न्यायालय परिसर और न्यायालय कक्ष में एक दोषसिद्ध व्यक्ति के चरण छूने का कृत्य अधिवक्ता परिधान में रहते हुए किया है जो अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाता है। उन्होंने सभी को 14 दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा।
वहीं ज़ब महामंत्री के इस कदम की जानकारी अधिवक्ताओं को हुई तो इसका भी विरोध होने लगा जिसकी कमान बार के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार मिश्र ने संभाली और एक दिन बाद ही पत्र जारी करते हुए महामंत्री के पत्र को ही अवैध बता दिया।
अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार मिश्र ने पत्र में लिखा की चूंकि महामंत्री द्वारा बिना कार्यकारिणी की बैठक बुलाये, अध्यक्ष और कार्यकारिणी को बिना विश्वास में लिए ही अधिवक्ताओं को नोटिस जारी कर दिया जो की महामंत्री के अधिकार में ही नहीं है इसलिए 20 मार्च को जारी महामंत्री के आदेश को निरस्त किया जाता है।
अब देखना ये है की बार के शीर्ष पदों पर बैठे दो अधिकारियों के बीच जन्मे संघर्ष की परिणीति कैसी होती है और संघर्ष कहाँ तक जाता है, हालांकि ये बात तो सत्य है की अधिवक्ता परिधान में किसी के भी पैर छूना उचित नहीं और व्यक्ति अगर दोषशिद्ध है तो ये और भी बड़ा गुनाह हो जाता है क्योंकि ऐसा कर आप कहीं न कहीं न्यायालय और उसके आदेश का अपमान भी कर रहे हैं या उसे ठेंगा दिखा रहे हैं।
वैसे कुछ अधिवक्ताओं का ये भी कहना है की निजी सम्बन्ध में कोई किसी के भी पैर छू सकता है और यदि कोई दोषसिद्ध व्यक्ति घर का है तो क्या उसे छोड़ दिया जायेगा तो उनके लिए जवाब ये हो सकता है की यदि ये कार्य निजी सम्बन्ध और घर के व्यक्ति के लिए है तो घर तक ही सीमित रखते हुए बिना अधिवक्ता परिधान के होना चाहिए न की चाटुकारिता की पराकाष्ठा में न्यायालय की गरिमा और अधिवक्ता की गरिमा को ठेस पहुँचाते हुए न्यायालय परिसर और अधिवक्ता परिधान में।