मध्य प्रदेश शिक्षा

बुन्देलखण्ड के कठोर भू-भाग में सीमित भूजल मौजूद, वाटर रिचार्जिंग तकनीकों पर ध्यान देने की है जरूरत- जल भू-वैज्ञानिक अनिल खरे

Written by Vaarta Desk

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की भूगर्भ शास्त्र अध्ययन शाला के छात्रों को दिया गया रेजिस्टिविटी प्रशिक्षण

(मदन साहू)

छतरपुर (मध्यप्रदेश) । महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी की कुलगुरु प्रो. शुभा तिवारी के संरक्षण में तथा कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल के निर्देशन में 3 अप्रैल को अनिल खरे, जल भू-वैज्ञानिक द्वारा फील्ड में किस प्रकार रजिस्टिवी सर्वे किया जाता है, करके दिखाया। इस रेजिस्टिविटी सर्वे प्रशिक्षण में अध्ययन शाला के छात्र-छात्राएं रिसर्च स्कॉलर तथा भू गर्भ शास्त्र के अतिथि विद्वान भी उपस्थित रहे।

इस दौरान वैनर तथा स्लमबर्गर विधियों का उपयोग करके रेजिस्टिवटी निकालना बताया गया। फील्ड ट्रैनिंग के बाद अनिल खरे के द्वारा रेजिस्टिविटी सर्वे पर व्याख्यान दिया गया। जिसमें उन्होंने रेजिस्टिविटी सर्वे की कर्व मैचिंग के द्वारा सतह के नीचे पाई जाने वाली चट्टानों के बारे में जानकारी दी। वाटर टेस्टिंग, रीचार्जिंग स्ट्रक्चर के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बुंदेलखंड की स्ट्रैटिग्राफी के बारे में समझाते हुए बताया कि बिजावर, विंध्यन ग्रेनाइट, एल्यूवियम कवर तथा बुंदेलखंड क्षेत्र में कठोर भूभाग उपस्थित होने के कारण पानी भ्रंश क्षेत्र में मिलता है, जो काफी सीमित है। हमारा ग्राउंड वॉटर लेवल कम होने के कारण रीचार्जिंग स्ट्रक्चर के द्वारा ग्राउंड वॉटर रिचार्ज की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। जिससे भविष्य में हमारे लिए लाभप्रद हो सके।

यह रेजिस्टिविटी प्रशिक्षण प्रोफेसर पी के जैन के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। जो बहुत ही ज्ञानवर्धक तथा कौशल उपयोगी रहा।

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