उत्तर प्रदेश गोंडा स्वास्थ्य

मण्डल में टी बी के मिले 3816 नये रोगी, शुरू हुई चिकित्सा

मोबाइल टीमें तलाश रहीं ‘साइलेंट टीबी’ रोगी

पोर्टेबल एक्स-रे के साथ जोखिम वाली आबादी के बीच पहुंच रहे स्वास्थ्य कर्मी

गोण्डा। देवीपाटन मंडल से ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) उन्मूलन के लिए ज्यादा से ज्यादा मरीजों के चिंहिकरण का काम तेजी से चल रहा है। विभाग की गतिविधि महज जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की सबसे अधिक आशंका वाले जोखिम क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां सीधे लक्षित कार्रवाई की जा रही है। विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) से शुरू हुए 100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान के तहत अब तक मंडल में 3816 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इन सभी मरीजों का इलाज भी शुरू करा दिया गया है।

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमें हैं, जो अत्याधुनिक पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के साथ सीधे संवेदनशील आबादी के बीच पहुंच रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक राहुल पटेल ने बताया कि टीमें न केवल पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से टीबी की स्क्रीनिंग कर रही हैं, बल्कि मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य को भांपने के लिए शुगर, ब्लड प्रेशर (बीपी), हीमोग्लोबिन और बॉडी मास इंडेक्स की भी ऑन-स्पॉट जांच कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि मंडल में तय लक्ष्य 1191 के सापेक्ष अब तक 604 विशेष शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों व नियमित ओपीडी के जरिए बीते दो महीनों में कुल 3816 नए टीबी मरीजों को चिन्हित कर इलाज शुरू करा दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे स्क्रीनिंग के मामले में अकेले गोण्डा के संवेदनशील समूहों से आने वाले 9,312 लोगों की जांच की गई, जबकि मण्डल के चारों जिलों में इसकी कुल संख्या 36,056 तक पहुंच गई है। इस पूरी स्क्रीनिंग के दौरान जिन लोगों की रिपोर्ट में हल्के भी संकेत मिले, उनकी तत्काल सीबी-नाट जांच कराई गई, जिसके परिणामस्वरूप 194 ऐसे मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई जिन्हें खुद भी बीमार होने का कोई अंदाजा नहीं था। वर्तमान में मंडल के कुल 20,521 उपचाराधीन मरीजों को ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत सीधे उनके खातों में वित्तीय सहायता दी जा रही है।

जोखिम वाले समूहों पर मोबाइल टीमों की पैनी नजर-
अपर निदेशक, देवीपाटन मण्डल डॉ. अल्पना रानी गुप्ता ने बताया कि अभियान पूरी तरह हाई-रिस्क क्षेत्रों पर केंद्रित है। मोबाइल टीमें ईंट-भट्टों, क्रशरों, निर्माण स्थलों के श्रमिकों, मलिन बस्तियों, दूरस्थ गांवों और पूर्व मरीजों के परिजनों के बीच कैंप कर रही हैं। साथ ही कुपोषित बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह रोगियों की भी ऑन-स्पॉट स्क्रीनिंग की जा रही है।

लक्षण नहीं फिर भी कराइए जांच, हो सकती है टीबी-
अपर निदेशक ने आमजन से अपील की है कि बिना खांसी या बुखार के भी टीबी शुरुआती दौर में फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। लोग भ्रम और संकोच छोड़कर क्षेत्र में आ रही मोबाइल टीमों का सहयोग करें, संकोच छोड़ें और आगे आकर निशुल्क जांच जरूर कराएं।

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राजेंद्र सिंह

राजेंद्र सिंह (सम्पादक)

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