(उमेश चंद्र तिवारी)
बलरामपुर। अखिल भारतीय ब्राह्मण संगठन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, व राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता असीम कुमार पांडेय विशू भैया ने बलरामपुर के फुलवरिया बाईपास चौराहे पर महराजा स्व0 पाटेश्वरी प्रसाद की मूर्ति लगवाने के लिए जोर देकर कहा कि यहां विदेशियों की मूर्ति लगाने का अड्डा नहीं बनने दिया जायेगा.. क्योंकि बलरामपुर के असली संस्थापक व्यवस्थापक यही हैं इसके लिए सभी लोगो के सहयोग/समर्थन/एकता की आवश्यकता है….
क्योंकि स्वतन्त्रता के बाद या पहले या आज भी बलरामपुर में स्कूल, डिग्री कालेज, अस्पताल,ठहरने के लिए दो दो होटल, झारखंडी बिजलीपुर मंदिर देवीपाटन मंदिर, हॉकी फील्ड आदि आदि का अधिकतर योगदान बलरामपुर स्टेट का ही है.. इससे पहले तो तहसील/ कोर्ट /अधिकारी आवास /पिक्चर हाल /पावर हॉउस तक स्टेट की बिल्डिंग में ही था.. आजादी के बाद महराज बलरामपुर ने मुक्तहस्त से बलरामपुर को अपना परिवार समझकर विकास में सहयोग किया… जो न जानते हो वो पता करके समर्थन करें क्योंकि यह मांग बहुत ही अंदरूनी और व्यापक असर रखती है..महराज साहब कौन हैं ये बताने की जरूरत नहीं है याद दिलाने की जरूरत है और इसके लिए इनके प्रतीक चिन्ह की नगर के मुख्य आगमन द्वार पर आवश्यकता है, ये चौराहा किसी मूर्ति की स्थापना के लिए तैयार किया गया है लेकर जनभवना के अनुरूप कार्य होना चाहिए मेरा और सबका उद्देश्य होना चाहिए कि दबाव में कोई मूर्ति जबरन हम लोगों पर न थोपी जाये.. उसका विरोध होगा…
और विडंबना यह है कि बलरामपुर में किसी मुख्य चौराहे पर महराज बलरामपुर की मूर्ति तक नहीं है जो बलरामपुर की पहचान हैं.. वही मुख्य धारा से नदारद हैं..
ये बलरामपुर का प्रवेशद्वार है इसलिए यहां पर महराज की मूर्ति स्थापित की जाये इसके लिए अभियान चलाया जाये.. जो भी सहयोग मेरे लायक होगा वो मेरे द्वारा किया जायेगा, जरूरत पड़ी तो चंदा लगाकर बाकी जो बचेगा स्वयं लगाकर 11 फ़ीट की मूर्ति स्थापना होंगी ताकि सभी समझें कि सभी के सहयोग से मूर्ति लगवाई गई है .
.श्री पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि लोगो जबाब दो कि क्या यहां पर महाराजा स्व0 पाटेश्वरी प्रसाद की मूर्ति लगनी चाहिए कि नहीं लगनी चाहिए..? और अगर नहीं लगनी चाहिए तो क्यों नहीं लगनी चाहिए?
दूसरी किसी भी वोटनीति पर लगने वाली राजनैतिक मूर्ति का विरोध बलरामपुर के सम्मानित सम्भ्रात लोगों द्वारा नौजवानों द्वारा किया जाना चाहिए….. बलरामपुर राज भवन ने आपकी गरिमा को कायम रखा है अब आपका फर्ज बनता है कि आप सभी लोग मिलकर उस गरिमा को कायम रखिए अगर कोई दूसरी मूर्ति लगाने के लिए प्रयास किये तो इसके नुकसान के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होंगे….
