#सेशेल्स, इंदौर से भी छोटा,डेढ लाख की आबादी का छोटा देश..लेकिन काला धन छुपाने के लिए स्वर्ग
काले धन के भारतीय खिलाड़ियों का भी स्वर्ग । प्रधानमंत्री इसी देश की यात्रा पर हैं ..कोई सम्मान वागैरा लेना होगा ..खैर…महज 1.35 लाख आबादी वाला हिंद महासागर का छोटा-सा द्वीपीय देश सेशेल्स आबादी के लिहाज से 190 नंबर पर है।
लेकिन यही छोटा सा देश आखिर दुनिया भर के अरबपतियों, ऑफशोर कंपनियों और ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के लिए इतना खास क्यों है?
सेशेल्स की चर्चा इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री #नरेंद्रमोदी अफ्रीका के इसी सबसे छोटे इसी देश की दो-तीन दिन की यात्रा पर हैं। दशकों से इस छोटे से देश को #टैक्स_हेवन का दर्जा प्राप्त है।
वर्षों तक यहां विदेशी कंपनियों पर बेहद कम या शून्य कर, स्विट्जरलैंड जैसी कड़ी वित्तीय गोपनीयता और कुछ ही दिनों में शेल कंपनी बनाने की सुविधा मिलती रही। यही वजह रही कि दुनिया भर के कारोबारी, टैक्स बचाने वाले और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क यहां कंपनियां बनाते रहे।
ऑनलाइन बेटिंग और कारोबार से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी सेशेल्स में अपनी ऑफशोर कंपनियां पंजीकृत कीं। कुछ के सर्वर भी वही हैं। भारत के कई सट्टा कारोबारियों की कंपनियों के भी वहां होने के दावे किए जाते रहे हैं। कुल मिलाकर ब्लैक मनी छुपाने वालों के लिए भी एक स्वर्ग।
साल 2016 के #panama Papers और बाद में #Pandora Papers जैसे वैश्विक खुलासों में भी सेशेल्स का नाम बार-बार सामने आया। इन दस्तावेज़ों ने दिखाया कि सेशेल्स सहित कई टैक्स हेवन देशों में बनी हजारों शेल कंपनियों का इस्तेमाल कई भारतीयों ने भी अपना काला धन छिपाने, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोपों से जुड़े नेटवर्क में किया गया।
हाल ही में हिडेनबर्ग पेपर में भी विनोद अदानी से जुड़ी थियोडोर फाइनेंशियर कंपनी का ठिकाना इसी देश में है। इस कंपनी पर आरोप है कि इसके खातों से सेसल्स से सिंगापुर में ,अदानी ग्लोबल में लाखों डॉलर ट्रांसफर किए गए थे। और इसी पैसे का उपयोग , #अडानी के शेयरों को खरीदने मैं लगाने के आरोप हैं। हालांकि हम इसकी पुष्टि नहीं करते।
इसका एरिया इंदौर जैसे शहर से थोड़ा सा छोटा और भोपाल से थोड़ा सा बड़ा लगभग 500 वर्ग किलोमीटर है.. यहीं पर प्रधानमंत्री मोदी भी तीन दिनों के दौरे पर हैं। मिलने सम्मान वगैरा लेने के बाद कुछ सामरिक और पर्यटन से जुड़े समझौते की बात होनी है।
बड़ा सवाल यह है कि जैसे दूसरे देशों ने से सेशेल्स से समझौते कर , वहां से काला धन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए हैं.. क्या मोदी सरकार भी ऐसा ही कोई समझौता कर उन भारतीयों के नाम उजागर करेगी। जिन्होंने करोड़ों और वह रुपए का काला धन , दुनिया के सबसे छोटा देश में से एक में कागजी कंपनियों के जरिए छुपा रखा है।
साभार :- सुनील सिंह बघेल का फेसबुक वाल
