अज़ब ग़ज़ब अपराध उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य

बिना टांका लगाए महिला को कर दिया डिस्चार्ज, ऊपर से कर ली 12 हज़ार की अवैध वसूली

Written by Vaarta Desk

सी एच सी पर तैनात महिला चिकित्सक का गज़ब कारनामा 

पुलिस सहित सी एम ओ कर रहे मामले की जाँच 

डी जी पी कार्यालय में तैनात सिपाही के साथ हो गया कांड 

लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सा विभाग में व्याप्त भ्रस्टाचार और लापरवाही के किस्से जगजाहिर होने के बाद भी न तो विभाग अपनी कार्यशैली बदलने को तैयार है और न ही प्रशासन कोई सबक ले रहा है जिसका परिणाम आए दिन मरीजो को मौत के मुँह में जाना पड रहा है, ताज़ा मामला भी कुछ ऐसे ही भ्रस्ट आचरण से जुड़ा है जिसमे हज़ारों की वसूली करने के बाद भी महिला चिकित्सक द्वारा अपनाये गए लापरवाह रवैये ने महिला मरीज को मौत के मुँह तक पहुंचा दिया, हालांकि शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी जाँच के लिए टीम का गठन कर दिया है।

मामले में सबसे खास बात तो ये है की पीड़ित प्रदेश के पुलिस मुखिया के कार्यालय में तैनात है और घटना प्रदेश की राजधानी में घटी है जिससे इस बात का अंदाजा लगाना आसान है की प्रदेश के अन्य जनपदों और आम गरीब जनता को किस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही होंगी।

घटना राजधानी के इंटोजा सी एच सी का है जानकारी के अनुसार पुलिस महानिदेशक कार्यालय में तैनात सिपाही सुरेंद्र पाल ने अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव हेतु सी एच सी में भर्ती कराया था जहाँ पर तैनात महिला चिकित्सक डा मधुश्री ने सुरेन्द्र की पत्नी शिवानी का सिजेरियन ऑपरेशन किया और उसे डिस्चार्ज भी कर दिया।

आरोप है की डा मधुश्री ने शिवानी का ऑपरेशन तो किया लेकिन पेट में टांके ही नहीं लगाए, घर पहुँचने पर ज़ब शिवानी की स्थिति बिगड़ने लगी तो सुरेन्द्र उसे लेकर दो दिन बाद पुनः डा मधुश्री के पास पहुंचा लेकिन डा ने उसकी चिकित्सा की जगह वीरांगना अवंति बाई महिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।

सिपाही सुरेन्द्र पाल ने बताया की चिकित्सक मधुश्री ने पत्नी की सुरक्षित प्रसव के नाम पर चिकित्साकर्मियों के माध्यम से पूरे १२ हज़ार की अवैध वसूली करने के बाद घोर लापरवाही की जिसके कारण पत्नी की जान पर बन आई है, सुरेन्द्र ने पूरे मामले की शिकायत स्थानीय थाने के साथ ही सी एम ओ से भी की है, शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जाँच में जुट गईं है वहीं सी एम ओ ने जाँच के लिए टीम का गठन कर दिया है।

सोचने वाली बात तो ये है की ज़ब प्रदेश की राजधानी में शासन के मुखिया के नाक के नीचे और पुलिस मुखिया कार्यालय में तैनात कर्मचारी के साथ ऐसी घटना घट सकती है तो प्रदेश के अन्य जनपदों और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या हाल होगा और चिकित्सक आम और असहाय रोगियों को किस तरह चूस रहे होंगे।

 

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