यूपी में कइयों की उतरेगी रंगदारी
संत कबीरनगर के एक सराफा व्यापारी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर ने यूपी मे सत्ता के संरक्षण में पलने वाले अपराधियों की पोल खुलकर ऱख दी है..उनकी एक याचिका ने गन कल्चर एक बड़े जनहित के मुद्दे का रूप दे दिया है.जयशंकर मुख्य रूप से सोने के गहने बेचने के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं..अपने इस व्यापार के कारण उन्हें अक्सर बड़ी मात्रा में सोना और नकदी लेकर यात्रा करनी पड़ती थी..उनकी जान-माल को हमेशा खतरा बना रहता था..
उन्होंने साल 2018 में शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था..जयशंकर का आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की रिपोर्ट समय पर (सितंबर 2018 में) लग जाने के बावजूद भदोही के जिलाधिकारी (DM) ने उनके आवेदन को 4 साल तक लटकाए रखा और नवंबर 2022 में उसे खारिज कर दिया.. इसके बाद विंध्याचल मंडल के एडिशनल कमिश्नर ने भी नवंबर 2025 में बिना सही कानूनी कारण बताए उनकी अपील को खारिज कर दिया..इस प्रशासनिक रवैये और ‘आर्म्स रूल्स, 2016’ (जिसके तहत 60 दिनों में फैसला लेना अनिवार्य है) के उल्लंघन के खिलाफ जयशंकर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर दी..सुनवाई के दौरान जयशंकर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि एक तरफ आम और कानून का पालन करने वाले जयशंकर जैसे नागरिकों को सुरक्षा और नियम के तहत हथियार का लाइसेंस देने में सालों साल लटकाया जाता है, जबकि दूसरी तरफ गंभीर आपराधिक इतिहास वाले बाहुबलियों, माफियाओं और राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों को नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से शस्त्र लाइसेंस देने के साथ सरकारी सुरक्षा बांट दी जाती है..आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पुलिस सुरक्षा में मूंछे ऐंठते घूम रहे हैं..जबकि हैं इतने बहादुर कि सरकारी सुरक्षा न मिले तो घर से न निकलें (श्रीप्रकाश शुक्ला के समय बहुतों ने घर से निकलना बंद कर दिया था.)खैर .
इस दलील के बाद यूपी सरकार के आंकड़े पेश किए गए जो चौंकाने वाले थे..प्रदेश में 6,000 से अधिक दागियों के नाम लाइसेंसजारी हैं….इसके बाद जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने जयशंकर के मामले को व्यापक जनहित से जोड़ते हुए राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह समेत उत्तर प्रदेश के 19 से अधिक बड़े बाहुबलियों और प्रभावशाली नेताओं के शस्त्र लाइसेंस और आपराधिक इतिहास की सघन जांच के आदेश दे दिए हैं..जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने प्रदेश के जिन प्रमुख 19 चेहरों की आपराधिक कुंडली और शस्त्र विवरण माँगा है जिनके बारे में जानकारी मांगी गई हैं ..उनमें बृजभूषण शरण सिंह, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह, सुशील सिंह, अब्बास अंसारी, खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव, जुगनू वालिया का नाम शामिल है।
हालांकि इसके साथ ही ब्यौरा प्रदेशभर से आपराधिक प्रवित्ति के लोगों का माँगा गया है.. इलाकेवार चर्चा करें तो
नोएडा कमिश्नरेट —
1. अमित कसाना
2. अनिल भाटी
3. रणदीप भाटी
4.मनोज आसे
5.अनिल दुजाना
6.सुन्दर सिंह भाटी
7.शिवराज सिंह भाटी।
• जोन मेरठ —
1. उधम सिंह
2. योगेश भदौड़ा
3. मदन सिंह बद्दो
4. हाजी याकूब कुरैसी
5. शारिक
6. सुनील राठी
7. धर्मेंद्र
8. यशपाल तोमर
9 अमरपाल कालू
10. अनुज बरखा
11. विक्रांत विक्की
12. हाजी इकबाल
13. विनोद शर्मा
14. सुनील उर्फ मुच्छ
15. संजीव माहेश्वरी
16. विनय त्यागी उर्फ टिंकू
• आगरा क्षेत्र —
1. अनिल चौधरी
2. ऋषि कुमार शर्मा
• लखनऊ जोन और लखनऊ कमिश्नरेट —
1. खान मुबारक
2. अजय प्रताप सिंह (अजय सिपाही)
3. संजय सिंह सिंघला
4. अतुल वर्मा
5. मोहम्मद साहिम
6. सुधाकर सिंह
7. गुड्डू सिंह
8. अनूप सिंह
9. लल्लू यादव
10. बच्चू यादव
11. जुगुनू वालिया (हरविंदर)
• प्रयागराज जोन एवं कमिश्नरी —
1. डब्बू सिंह उर्फ प्रदीप सिंह
2. बच्चा पासी (निहाल सिंह)
3. दिलीप मिश्रा
4. जावेद
5. राजेश यादव
6. गणेश यादव
7. कमरुल हसन
8. जावीर हुसैन.
• वाराणसी जोन एंड कमिश्नरेट —
1. त्रिभुवन सिंह (पवन सिंह)
2. विजय मिश्रा
3. कुंटू सिंह (ध्रुव सिंह)
4. अखंड प्रताप सिंह
5. रमेश सिंह काका
6. अभिषेक सिंह हनी (जहर)
7. बृजेश कुमार सिंह
8. सुभाष सिंह ठाकुर
9. अब्बास अंसारी
10. पिंटू सिंह.
• गोरखपुर जोन और कमिश्नरी —
1. राजन तिवारी
2. संजीव द्विवेदी (रामू द्विवेदी)
3. राकेश यादव
4. सुधीर सिंह
5. विनोद उपाध्याय
6. रिजवान जहीर
7. देवेंद्र सिंह.
• कानपुर जोन —
1. अनुपम दुबे
2. सऊद अख्तर
के बारे में भी जानकारी मांगी गई है.. ये बात दीगर है कि इनमें कई स्वर्ग सिधार गए हैं
इन पर गाज गिरना लगभग तय है क्योंकि सरकार ने कोर्ट को बताया कि यूपी में 10 लाख से ज्यादा एक्टिव शस्त्र लाइसेंस हैं, जिनमें से 6,062 लाइसेंसधारी दागी यानि कि आपराधिक इतिहास वाले हैं..ये आंकड़े देखकर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है.: कोर्ट ने गृह विभाग के संयुक्त सचिव और सभी जिलों के पुलिस कप्तानों,कमिश्नरों को आदेश दिया है कि वे 26 मई 2026 तक यह हलफनामा दें कि इन गंभीर अपराधियों को किन परिस्थितियों में हथियार और सुरक्षा दी गई,, कोई भी जानकारी छिपाने पर अधिकारी खुद जिम्मेदार होंगे..इस मामले से जुड़ी अगली सुनवाई 26 मई को है।
साभार :- अभिषेक चतुर्वेदी के फेसबुक वाल से
