अभिनेता सुनील दत्त की थी प्रमुख भूमिका
जो लोग समझते रहे कि बाला साहेब ठाकरे हिन्दू सम्राट थे वह केवल चेहरे के ऊपर का नकाब देख रहे थे किन्तु नकाब के पीछे बाला साहेब ठाकरे कुछ और ही थे, कभी तीन तिकड़ी बोले तो ठाकरे दाऊद पवार पावर और पैसा के लिए ये हिंदूवादी नक़ाब लगा रखा था अन्यथा ये केवल भ्रम था।
आज जो मुंबई में अवैध करवाई हो रही है इसकी जरूरत आज नहीं पड़ती अगर सच में ये हिन्दू के हित के साथ रहते, ऐसे ही नकाब यूपी में मुलायम सिंह यादव और बिहार में लालू यादव ओढ़े रहे।
संजय दत्त को मिला यह आशीर्वाद असल में किसी और तक पहुंचा था :-
साल था 1984 । अभिनेता सुनील दत्त पहली बार सांसद बने। कहा जाता है कि उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को मुंबई में बसाया तथा अपने लोकसभा क्षेत्र में उन्हें स्थापित किया। धीरे-धीरे पूरा बेहरामपाड़ा बांग्लादेशियों से भर गया। मातोश्री से लगभग 500 मीटर की दूरी पर यह बस्ती विकसित हुई, किन्तु उस समय किसी प्रकार का प्रतिरोध नहीं हुआ। उस काल में Rajiv Gandhi प्रधानमंत्री थे और आरोप लगाए जाते हैं कि यह सब उनकी प्रत्यक्ष देखरेख में हुआ।
उल्टा, बीएमसी द्वारा वहाँ विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। उस समय देश, राज्य और मुंबई में सत्ता किसकी थी तथा मुंबई पर प्रभाव किसका था, यह सभी जानते हैं।
फिर आया 12 मार्च 1993 । मुंबई में 12 बम विस्फोट हुए। ठीक एक महीने बाद 19 अप्रैल 1993 को उस प्रकरण में Sanjay Dutt को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से AK-56 बरामद होने की बात सामने आई। टाडा कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी होने के कारण जमानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन माना जा रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त संजय मामले में सुनील दत्त, हर उस कांग्रेसी नेता के पास पहुंचे जिससे उन्हें मदद की गुंजाइश थी. लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संजय के मामले में लोगों ने पल्ला झाड़ लिया था. कहा जाता है कि ऐसे मुश्किल वक्त में सुनील दत्त के समधी अभिनेता राजेंद्र कुमार ने उन्हें शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे से मिलने की सलाह दी ।
24-25 अप्रैल 1993 को सुनील दत्त ने बाल ठाकरे से भेंट की। कहा जाता है कि उन्होंने संजय दत्त को जमानत दिलाने हेतु सहयोग का अनुरोध किया।
अक्टूबर में संजय दत्त को जमानत मिली। जमानत पर बाहर आने के बाद सुनील दत्त उन्हें मातोश्री ले गए। जेल से लौटे संजय दत्त को बाला साहेब ठाकरे ने गले लगा लिया । बाल ठाकरे ने कहा कि “मेरी पत्नी के निधन के बाद मुझे खुश होने का कोई मौका नहीं मिला। आज संजय दत्त को जेल से बाहर निकलते देखकर मैं पहली बार खुश हो रहा हूं।”’
इसके बाद यह भी कहा गया कि सहयोग के बदले सुनील दत्त को चुनाव न लड़ने की सलाह दी गई। सुनील दत्त ने चुनाव नहीं लड़ा तथा अप्रत्यक्ष रूप से शिवसेना प्रत्याशी का समर्थन किया। परिणामस्वरूप मधुकर सरपोतदार सांसद बने।
जब तक बीएमसी ठाकरे परिवार के प्रभाव में रही, तब तक इन घुसपैठियों की तीसरी पीढ़ी भी मतदाता बन गई। केवल पानी और सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि आधार सहित अनेक सरकारी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए। परिणामस्वरूप वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी बन गए।
मातोश्री-1 के बाद मातोश्री-2 भी बनी, जो बेहरामपाड़ा से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है, किन्तु तब भी कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई।
यह कथित और अघोषित गठबंधन आगे भी चलता रहा।
15 जनवरी 2026 बीएमसी से मुंबईकरों ने शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया।
आज परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। न राज्य सरकार में उद्धव ठाकरे की शिवसेना है, न कांग्रेस का प्रभाव वैसा है और न ही बीएमसी में ठाकरे परिवार का नियंत्रण है। ऐसा कहा जा रहा है कि यदि राज्य सरकार या बीएमसी में पूर्व जैसी राजनीतिक स्थिति होती, तो बेहरामपाड़ा में वर्तमान कार्यवाही संभव नहीं होती।
समर्थकों के अनुसार आज रेलवे (केंद्र सरकार), पुलिस (राज्य सरकार) और बीएमसी — तीनों स्तरों पर भाजपा समर्थित “ट्रिपल इंजन” व्यवस्था होने के कारण बेहरामपाडा और गरीब नगर, बांद्रा (पूर्व) में कार्रवाई संभव हो रही है।
