बिहार की राजनीति से जुड़े चर्चित IRCTC घोटाला मामले में आज दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बेटे व नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर तय की है।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने रांची और पुरी स्थित दो IRCTC होटलों को निजी कंपनी सुजाता होटल्स को लीज पर देने में नियमों की अनदेखी की। CBI और ED का आरोप है कि इसके बदले में पटना के बेली रोड स्थित तीन एकड़ जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बेहद कम कीमत पर ट्रांसफर कर दी गई। इस जमीन की बाजार कीमत करीब 32 करोड़ थी, लेकिन इसे सिर्फ 65 लाख में बेचा गया था।
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। एजेंसी का दावा है कि यह लेनदेन रिश्वत के तौर पर किया गया था। हालांकि लालू परिवार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। कोर्ट के बाहर तेजस्वी यादव ने कहा, “यह पूरी तरह से राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। जब से हम भाजपा के खिलाफ खड़े हुए हैं, तब से एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हम न्यायपालिका पर भरोसा करते हैं।”
भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। बिहार भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि जो लोग रेलवे की संपत्ति को अपने परिवार की संपत्ति समझते थे, उन्हें अब हिसाब देना पड़ेगा।
आज की सुनवाई में लालू यादव व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे थे। उनकी तबीयत को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें बैठने की अनुमति दी। वकीलों ने जमानत की अवधि बढ़ाने और दस्तावेजों की जांच के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। यह केस पिछले कई सालों से चल रहा है और बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। अगर चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाता है तो लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें 15 अक्टूबर पर हैं।
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