इटियाथोक बिसुही नदी नया पुल, 5 लाख लोगों को मिलेगी जाम से निजात
गोंडा। बलरामपुर मार्ग पर सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जिले के इटियाथोक बाजार में बिसुही नदी पर बना 114 साल पुराना अंग्रेजों के जमाने का जर्जर पुल अब इतिहास बनने वाला है। इसकी जगह 16 करोड़ रुपये की लागत से नया 3-लेन आधुनिक पुल बनाया जाएगा। नेशनल हाईवे खंड अयोध्या ने इसके निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
यह पुल 1912 में अंग्रेजी हुकूमत में बनाया गया था। उस समय यह सिंगल लेन पुल था। 2018 में जब गोंडा-बलरामपुर मार्ग को टू-लेन किया गया और इसे नेशनल हाईवे 927 का दर्जा मिला, तब से यह पुल सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। सड़क चौड़ी हो गई लेकिन पुल संकरा ही रह गया। रोजाना यहां लंबा जाम लगता है, बड़े ट्रक और बसों को निकलने में घंटों लग जाते हैं। पुल की हालत भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जगह-जगह से गिट्टियां उखड़ रही हैं और रेलिंग टूटी हुई है।
स्थानीय दुकानदार राजेश गुप्ता बताते हैं कि बरसात में तो हालत और खराब हो जाती है। पुल पर पानी भर जाता है और हादसे का डर बना रहता है। कई बार इसकी मरम्मत की मांग उठी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जब नए पुल को मंजूरी मिली है तो पूरे इटियाथोक बाजार में खुशी का माहौल है।
नया पुल 210 मीटर लंबा और 3 लेन का होगा। इसमें फुटपाथ भी होगा ताकि पैदल यात्रियों को सुविधा मिले। एनएच अधिकारियों के अनुसार पुल का निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बनने से सिर्फ गोंडा ही नहीं बल्कि बलरामपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर जिले के करीब 5 लाख यात्रियों को सीधा फायदा होगा। गोंडा से बलरामपुर जाने में अब 30 मिनट कम लगेंगे।
गोंडा के सांसद और विधायक ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है। उनका कहना है कि यह पुल पूर्वांचल के विकास की नई रफ्तार बनेगा।
इटियाथोक बाजार पूर्वांचल का बड़ा व्यापारिक केंद्र है। यहां से रोजाना सैकड़ों ट्रक सब्जी, अनाज और अन्य सामान लेकर गुजरते हैं। पुराने पुल के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। नया पुल बनने से व्यापार भी बढ़ेगा।
फिलहाल पुराने पुल के बगल में ही नए पुल की नींव रखी जा रही है। निर्माण के दौरान पुराने पुल पर यातायात जारी रहेगा ताकि लोगों को दिक्कत न हो। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि निर्माण के दौरान सहयोग करें।
114 साल पुराना यह पुल अंग्रेजों की इंजीनियरिंग का नमूना था लेकिन अब समय के साथ इसे बदलना जरूरी हो गया था। नया पुल आधुनिक तकनीक से बनेगा और अगले 100 साल तक मजबूती से खड़ा रहेगा।
