प्रक्रिया के नाम पर हो रहे उत्पीड़न का प्रत्यक्ष प्रमाण आया सामने
क्योँझर (उडीसा)। सरकारी नियम क़ानून की अव्यवहारिकता और कर्मचारियों की अमानवीयता भरी कार्यशैली एक आम व्यक्ति पर कितनी भारी पडती है इसका प्रमाण देखना हो तो जिले की इस घटना से बड़ा उदाहरण कहीं और नहीं मिल सकता जिसमे बैंक कर्मियों की हठधार्मिता और नियमों के झमेले में फंसे व्यक्ति को तीन माह पूर्व मृत अपनी बहन के कंकाल को लेकर बैंक पहुँचने को विवश होना पड़ गया।
दरअसल मामला जिले के दियानली गाँव निवासी जीतू मुंडा और उसकी बहन से जुड़ा हुआ है, जानकारी के अनुसार विगत जनवरी माह में जीतू की बहन कालरा मुंडा की मृत्यु हो गईं, कालरा के बैंक में लगभग २०००० रुपये जमा थे, कालरा की बैंक खाते में दर्ज नामिनी की भी मृत्यु हो चुकी थी, विपन्नता की स्थिति में जीवन यापन कर रहे जीतू और उसके परिवार के लिए कालरा के खाते में जमा पैसे किसी वरदान से कम नहीं थे।
कालरा के जीवित बचे एकमात्र नजदीकी वारिस के रूप में जीतू ही बचा था इसलिए उसने बैंक से कालरा के खाते में जमा पैसे निकालने चाहे लेकिन बैंक ने उसे नियमों का हवाला देते हुए दौड़ाना जारी रखा, बैंक उससे बार बार एक ही बात कहता की खातेदार को लाओ तभी पैसा निकलेगा और जीतू बार बार ये दोहराता की खातेदार की मृत्यु हो चुकी है।
तंग आकर जीतू कब्रिस्तान पहुंचा और क़ब्र खोदकर पूरी तरह कंकाल हो चुकी कालरा की लाश को निकाला और चादर में लपेट कर बैंक पहुँच गया और कर्मियों के सामने रख दिया।
कंकाल के साथ आये जीतू को देखते ही पूरे बैंक में हड़कंप मच गया, पुलिस को सूचना दी गईं, मौक़े पर पहुंची पुलिस ने जीतू से पूरी बात की और उसकी समस्या के निराकरण का आश्वासन देते हुए बताया की जीतू पूरी तरह निरक्षर है और उसे बैंककर्मी सही तरीके से बात को समझा नहीं पा रहे, उसकी समस्या के निराकरण के लिए उसका सहयोग किया जायेगा।
