दृष्टिकोण

“धरती की सतह पर” – अदम गोंडवी की वो आवाज़ जो आज भी गूंजती है

Written by Vaarta Desk

जब हम हिंदी ग़ज़ल की बात करते हैं तो दुष्यंत कुमार के बाद जो सबसे बड़ा नाम उभरता है, वो है अदम गोंडवी । और अब “धरती की सतह पर” नाम की इस किताब के साथ ‘अदम’ फिर से हमारे बीच आ गए हैं।

संपादक महेश सिंह ने इस किताब के माध्यम से अदम की वो शायरी, वो विचार और वो संघर्ष एक जगह समेट दिया है जो उन्हें “जन कवि” बनाता है।
1. नाम में ही पूरा अदम है
“धरती की सतह पर” – ये सिर्फ एक किताब का शीर्षक नहीं है। ये अदम गोंडवी के पूरे जीवन दर्शन का सार है।
उन्होंने कभी आसमान की परियों से बात नहीं की। उनकी ग़ज़ल हमेशा खेत, खलिहान, फाइल, थाने और संसद के चक्कर काटती जनता की बात करती है।

जैसे:
“जो उलझकर रह गई है फाइलों के जाल में।
वो योजना गाँव तक पहुँचेगी कितने साल में।”

  1. ग़ज़ल को लोकतांत्रिक बनाने वाला शायर
    अदम से पहले ग़ज़ल को “माशूक के जलवे” और “शराब-कबाब” तक सीमित कर दिया गया था। अदम ने उसे तोड़कर बाहर निकाला।
    उन्होंने ग़ज़ल को किसान की भाषा दी, मजदूर का दर्द दिया, और सत्ता से सवाल पूछने की हिम्मत दी।

“काजू भुनी प्लेट में, व्हिस्की गिलास में।
उतरा है रामराज विधायक निवास में।”

ये दो लाइनें ही बता देती हैं कि अदम की कलम कितनी बेलौस और बेबाक थी।
3. आज की प्रासंगिकता
आज जब भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और झूठे वादों की बात हर तरफ है, तब अदम की शायरी और भी जरूरी हो जाती है।
“धरती की सतह पर” हमें याद दिलाती है कि साहित्य का काम सिर्फ मनोरंजन नहीं, समाज को आईना दिखाना भी है।
4. संपादन के लिए साधुवाद
महेश सिंह को दिल से धन्यवाद कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण काम को अंजाम दिया। अदम जैसे शायर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना एक बौद्धिक जिम्मेदारी है, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है।
निष्कर्ष
“धरती की सतह पर” हर उस व्यक्ति को पढ़नी चाहिए जो सोचता है कि शायरी सिर्फ इश्क-मोहब्बत के लिए होती है।
ये किताब बताती है कि शायरी क्रांति भी हो सकती है। शायरी बगावत भी हो सकती है। और शायरी जनता की आवाज़ भी हो सकती है।
अदम चले गए, पर उनकी कलम “धरती की सतह पर” आज भी चल रही है।

संग्रह टाइम्स पब्लिकेशंस, दिल्ली से प्रकाशित होगा अदम गोंडवी की कालजयी कृति ‘धरती की सतह पर’ का चतुर्थ संस्करण
हिंदी साहित्य और जनपक्षधर कविता के अप्रतिम हस्ताक्षर अदम गोंडवी की बहुचर्चित काव्य कृति ‘धरती की सतह पर’ का चतुर्थ संस्करण शीघ्र ही संग्रह टाइम्स पब्लिकेशंस, दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण संस्करण का संपादन महेश सिंह ने किया है। संपादकीय दृष्टि से यह संस्करण पाठकों, शोधार्थियों तथा साहित्य प्रेमियों के लिए अधिक उपयोगी और संग्रहणीय बनाया गया है। पुस्तक में अदम गोंडवी की जनचेतना, सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध प्रखर स्वर तथा आम जनजीवन की पीड़ा को अभिव्यक्त करने वाली प्रतिनिधि रचनाओं को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह चतुर्थ संस्करण अदम गोंडवी की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। संग्रह टाइम्स पब्लिकेशंस का उद्देश्य हिंदी साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों को उच्च गुणवत्ता के साथ पाठकों तक पहुँचाना तथा जनपक्षधर साहित्य के संरक्षण और प्रसार को नई गति देना है।
पुस्तक विवरण:
पुस्तक: धरती की सतह पर
रचनाकार: अदम गोंडवी
संपादक: महेश सिंह
प्रकाशक: संग्रह टाइम्स पब्लिकेशंस, दिल्ली
संस्करण: चतुर्थ (Fourth Edition) Ph 8587845350

 

दिलीप गोंडवी 

ख़तरनाक कवि 

 

 

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